चिलकहर(बलिया)। जो सीना ताने सीमा पर तोपों से लड़ जाते हैं, उसकी गाथा लिखने को अंबर भी छोटे पड़ जाते हैं....। कुछ ऐसी ही गाथा शहीद सीआरपीएफ जवान राजेंद्र प्रसाद की लिखी जाएगी। जो बीते दिनों झारखंड के चपरा जिले में नक्सलियों के साथ हुई मुठभेड़ में शहीद हो गए। गुरुवार को जवान का शव गड़वार थाना क्षेत्र के रामपुर असली गांव में पहुंचते ही कोहराम मच गया। शहीद की एक झलक पाने को हजारों की संख्या में लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। गाड आफ आनर के साथ उनको अंतिम विदाई दी गई। नगर के महावीर घाट पर अंतिम संस्कार किया गया।
गड़वार थाना क्षेत्र के रामपुर असली गांव निवासी राजेंद्र प्रसाद (47) सीआरपीएफ के जवान थे। उनकी तीन पुत्री तथा एक पुत्र है। कुछ दिन पहले जवान एक महीने के लिए छुट्टी पर आए हुए थे। अपनी बड़ी वाली लड़की के लिए लड़का भी देख लिए थे। वापस ड्यूटी पर जाते वक्त घरवालों से वादा किए थे कि अगली बार आएंगे तो रिश्ता पक्का कर बड़ी बेटी हाथी पीला करेंगे। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। ड्यूटी के दौरान ही झारखंड के चपरा जिले में नक्सलियों के मुठभेड़ में वे शहीद हो गए। शुक्रवार को जब उनका पार्थिव शरीर गांव आया तो लोगों अपने आंसू नहीं रोक पाए। रूदन-क्रंदन से पूरे गांव में सियापा पसरा गया। सीओ सिटी केसी सिंह, पकड़ी एसओ मूलचंद्र चौरसिया, एसडीएम रसड़ा के नेतृत्व में उन्हें गाड आफ आनर दिया गया। नगर के महावीर घाट पर उनका अंतिम संस्कार हुआ।