पलट प्रवाह से एनएच -31 पर संकट, बाढ़ विभाग बेबस
पलट प्रवाह से एनएच -31 पर हुकुम छपरा के पास खतरा बढ़ता जा रहा है। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि फ्लड फाइटिंग के तहत तात्कालिक कार्रवाई में विभाग प्लास्टिक की बोरियों में मिट्टी भरकर नदी में डालकर नदी की धारा को थामने का प्रयास कर रहा है।
बाढ़ विभाग के एक्सईएन संजय कुमार मिश्र ने बताया कि चारों तरफ बाढ़ के कारण बालू उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। इसी कारण प्लास्टिक की बोरियों में मिट्टी भरकर नदी में डाला जा रहा है। मानक के तहत सभी कार्य किए जा रहे हैं। बाढ़ क्षेत्रों में स्थिति पर नजर रखी गई है।
सुरक्षा के लिए काटी गई बिजली
गंगा की बाढ़ का पानी तटवर्ती गांवों में प्रवेश कर गया है। इसे देखते हुए करीब 10 गांवों की बिजली आपूर्ति ठप कर दी गई है। इन गांवों में अंधेरा हो जा रहा है। प्रशासन की तरफ से प्रकाश की व्यवस्था नहीं की गई है। लैंप व मोबाइल चार्ज करने के लिए लोग दूसरे गांवों में जा रहे हैं। विद्युत वितरण खंड चार के अधिशासी अभियंता मूल चंद शर्मा ने बताया कि गांवों में पानी प्रवेश करने से सतर्कता की दृष्टि से आपूर्ति बंद की गई है।
इसे भी पढ़ें; अच्छी खबर: ऊर्जा के क्षेत्र में यूपी बनेगा आत्मनिर्भर, सोनभद्र में लगेंगे 11 पावर प्लांट; पढ़ें- पूरी योजना
नरहीं क्षेत्र में गंगा संग टोंस व मगई का फैलने लगा पानी
नरहीं इलाके को गंगा, टोंस और मगई नदी का पानी खेतों में तेजी से फैलने लगा है। गंगा का जलस्तर और बढ़ा तो गंगहरा, रैया खाड़ी, सरवनपुर बस्ती, बेल्सीपाह गांवों का संपर्क टूट सकता है। तटवर्ती इलाकों के लोगों की परेशानी फिर से बढ़ने लगी है । गंगा के कटान के मुहाने पर बसे शाहपुर बभनौली, रैया खाड़ी गांव के लोगों कहना है कि गंगा में बढ़ाव बना रहा तो पलायन करना पड़ सकता हैं। मगई नदी का पानी करइल इलाके में फैलने लगा है। टोंस नदी का पानी नरहीं के लखनुआ,खमीरपुर, नीलकंठ पुर मौजे में पहुंच गया है धान एवं खरीफ की फसलें डूबने लगी है।
14 करोड़ से बन रहे ठोकर भी नहीं रोक पा रहे नदी की धारा को
सरयू नदी का जलस्तर घटाव पर है लेकिन कटान में तेजी है। पानी का दबाव कम होने के बाद नदी की धार किनारे से टकराकर तेजी से जमीन को काटने लगी है। बिजलीपुर, पुरुषोत्तम पट्टी, खरीद और जिन्दापुर गांवों में कटान में तेजी आई है। लोगों का कहना है कि क्षेत्र को नदी की बाढ़ से बचाने के लिए 14 करोड़ रुपये से ठोकर बनाए गए हैं। ठोकर बनने के बावजूद कटान में कमी नहीं आई है। फिलहाल ग्रामीण अपने स्तर से मिट्टी और बालू डालकर कटान रोकने का प्रयास कर रहे हैं।