फखरपुर सीएचसी में प्रसव के बाद एक प्रसूता को शनिवार रात कक्ष से बाहर निकाल दिया गया। वार्डों में ताले जड़ दिए गए। भूख प्यास से तड़प कर प्रसूता ने पूरी रात बाहर फर्श पर कराहते हुए बिताई। उसे न भर्ती किया गया और न ही समुचित इलाज मुहैय्या कराया गया। एंबुलेंस तक नहीं मिल पाई।
आखिरकार रविवार सुबह परिवारीजन निजी वाहन का इंतजाम कर नवजात व महिला को घर ले गए। अधिकारी मामले की जांच कर दोषियाें पर कार्रवाई की बात कह रहे हैं। रानीपुर क्षेत्र में होलपारा गांव निवासी उदुमराज की पत्नी कृष्णावती (32) को शनिवार सुबह प्रसव पीड़ा शुरु हुई।
दोपहर करीब 12 बजे पीड़ा बढ़ने पर कृष्णावती को परिवारीजन फखरपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले गए जहां इलाज शुरु हुआ। रात करीब नौ बजे कृष्णावती ने बेटी को जन्म दिया। लेकिन प्रसव के बाद कर्मचारियों ने कृष्णावती व उसके नवजात को भर्ती करने के बजाए अस्पताल से बाहर कर दिया।
कर्मचारियों ने अस्पताल बंद करने की बात कहते हुए वार्डों में ताला लगा दिया। उदुमराज ने एंबुलेंस की मांग की जिस पर चालक ने प्रसूता को घर छोड़ने से इंकार कर दिया। रात में निजी वाहन का भी इंतजाम नहीं हो सका। मजबूरन प्रसूता कृष्णावती फर्श पर कराहते हुए बिना कुछ खाए रात गुजारी।
वह करीब 13 घंटे तक फर्श पर पड़ी। रविवार सुबह करीब 10 बजे उदुमराज निजी वाहन का इंतजाम कर पत्नी व नवजात बेटी को घर ले गया। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. डीआर सिंह का कहना है कि 20 जून को वे टीम के साथ फखरपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचेंगे।
जेएसवाई, जेएसएसके व अन्य योजनाओं की गहनता से पड़ताल की जाएगी। उसी समय प्रसूता के साथ बरती गई संवेदनहीनता की भी जांच होगी। जरुरत पड़ी तो केंद्र अधीक्षक को हटाया जाएगा। इसके अलावा कोई कर्मचारी दोषी मिलता है तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।