घाघरा नदी का जलस्तर शुक्रवार रात से अचानक बढ़ने लगा है। कटान भी शुरू हो गई है। जिससे महसी तहसील क्षेत्र में नदी के मुहाने पर बसे सात गांवों के लिए खतरा उत्पन्न हो गया है। अचानक नदी का जलस्तर बढ़ने से मुहाने पर बसे गांवों के ग्रामीणों की धड़कनें तेज हो गई हैं।
अब तक राहत व बचाव के कोई इंतजाम नहीं किए गए हैं। अगर बाढ़ और कटान तेज होने की स्थिति बनी तो लोगों की गृहस्थी तो डूबेगी ही, उनको जीवन बचाना भी मुश्किल हो जाएगा। हालांकि घाघरा की कटान पर नजर रखने के लिए राजस्वकर्मियों की टीम लगाने का दावा किया जा रहा है। बाढ़ चौकियों को भी अलर्ट किया गया है।
घाघरा नदी का जलस्तर शुक्रवार तक जमीन के बराबर था। लेकिन नेपाल के पहाड़ों पर निरंतर हो रही वर्षा के चलते अचानक जलस्तर में इजाफा होने लगा है। शुक्रवार रात से शनिवार दोपहर तक जलस्तर में पांच फिट का इजाफा हुआ है।
सुबह नदी का बढ़ा जलस्तर देख तटवर्ती गांवों के लोगों की धड़कने तेज हो गईं। जलस्तर बढ़ने से महसी तहसील के पिपरा, नईबस्ती, कायमपुर, गोलागंज जरमापुर, अहिरनपुरवा, प्रधानपुरवा व गड़रियनपुरवा गांव निशाने पर आ गए हैं। यह सभी गांव तटबंध के उस पार बसे हुए हैं। लहरें ग्रामीणों के मकानों पर थपेड़े ले रही हैं। कटान भी शुरू हो गई है। किसानों की खेती योग्य जमीन को घाघरा की लहरें काट रही हैं। अचानक जलस्तर बढ़ने से तटवर्ती इलाकों के ग्रामीण परेशान हैं।
केंद्रीय जल आयोग संस्थान घाघराघाट के मापक जगदीश साहनी ने बताया कि शुक्रवार की शाम नदी का जलस्तर 102.016 मीटर था। लेकिन अचानक जलस्तर में वृद्धि शुरू हुई है। एक सेमी. प्रति घंटा की रफ्तार से नदी का पानी बढ़ रहा है। मापक साहनी के मुताबिक शनिवार दोपहर में नदी का जलस्तर 102.136 मीटर रिकॉर्ड किया गया।
सहायक अभियंता गिरिजापुरी बैराज संतराम वर्मा ने कहा कि नेपाल के पहाड़ों पर निरंतर वर्षा हो रही है। इससे जलस्तर बढ़ा है। उसी के चलते बैराज से घाघरा नदी में पानी छोड़ा जा रहा है। इस समय चौधरी चरण सिंह गिरिजापुरी बैराज से घाघरा नदी 55000 क्यूसेक से अधिक पानी डिस्चार्ज हो रहा है। अभी चिंता की कोई बात नहीं है। हालांकि नेपाली नदियों का पानी बढ़ने पर घाघरा के जलस्तर में और वृद्धि हो सकती है।
तहसीलदार महसी राजेश कुमार मिश्र ने बताया कि घाघरा नदी के जलस्तर में अचानक इजाफा हुआ है। राजस्वकर्मियों की टीमें गठित हैं। स्थिति पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। अभी तेज कटान की स्थिति नहीं बनी है। अगर कटान होगी तो उसकी सूची तैयार कर मुआवजे का इंतजाम किया जाएगा। फिर भी जलस्तर बढ़ोतरी के चलते क्षेत्र में बाढ़ चौकियां तैयार कर ली गई हैं। जरूरत पड़ने पर संचालन शुरू कर दिया जाएगा। ग्राम प्रधानों को नाव की व्यवस्था के लिए पहले ही अलर्ट किया जा चुका है।