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Bahraich News: गाद जमाव से प्रभावित हो रहा गेरूआ का जलप्रवाह

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मिहींपुरवा। कतर्नियाघाट जंगल के बीच से बहने वाली गेरूआ नदी में घटते जलप्रवाह और बढ़ते गाद जमाव का मुद्दा अब संसद तक पहुंच गया है। बहराइच सांसद डॉ. आनंद कुमार गोंड ने लोकसभा में गेरूआ नदी के बदलते स्वरूप और जलीय जीवों के प्राकृतिक आवास पर पड़ रहे प्रभाव को लेकर प्रश्न किया। केंद्र सरकार ने अपने जवाब में माना है कि जल प्रवाह कम होने के कारण नदी के कुछ स्थानों पर गाद जमा हुई है। सांसद ने गाद निकासी, प्राकृतिक जल प्रवाह की बहाली और जलीय जीवों के संरक्षण के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार करने की मांग की है।
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सांसद ने लोकसभा में अतारांकित प्रश्न संख्या 709 के माध्यम से चिंता जाहिर की कि गेरूआ नदी में लगातार जमा हो रही गाद, कम होती गहराई और घटते जलप्रवाह से नदी के अस्तित्व पर संकट तो नहीं खड़ा हो रहा है। उन्होंने नदी के बदलते स्वरूप का असर गंगा डॉल्फिन, घड़ियाल, मगरमच्छ, कछुओं और अन्य जलीय जीवों के प्राकृतिक आवास पर पड़ने की ओर भी इशारा किया।

सांसद ने कहा कि गेरूआ नदी कतर्नियाघाट की जैव विविधता की महत्वपूर्ण धुरी है। नदी के जलप्रवाह में कमी और गाद के बढ़ते जमाव से इसके प्राकृतिक स्वरूप में बदलाव की आशंका है। समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो नदी की जैव विविधता के साथ उस पर निर्भर वन्यजीवों और स्थानीय आबादी के सामने भी संकट पैदा हो सकता है। सांसद डॉ. गोंड ने नदी में प्राकृतिक जल प्रवाह बनाए रखने, गाद प्रबंधन और जलीय जीवों के संरक्षण के लिए विशेष अभियान चलाने की मांग की है।
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सरकार ने माना, कुछ स्थानों पर जमा हुई गाद
जल शक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी ने लोकसभा में दिए लिखित उत्तर में बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार से मिली जानकारी के अनुसार गेरूआ नदी में जलप्रवाह कम होने के कारण कुछ स्थानों पर गाद का जमाव हुआ है। हालांकि सरकार ने यह भी कहा कि नदियों में तलछट का कटाव, बहाव और जमाव प्राकृतिक भू-आकृतिक प्रक्रिया है, जिससे समय-समय पर नदी का स्वरूप बदलता रहता है।
गेरूआ में मौजूद हैं डॉल्फिन और घड़ियाल
केंद्र सरकार के जवाब के अनुसार भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून की ओर से वर्ष 2023 में किए गए सर्वेक्षण में गेरूआ नदी में गंगा डॉल्फिन और घड़ियाल की मौजूदगी दर्ज की गई है। नदी में मगरमच्छ, कछुए और अन्य जलीय जीव भी पाए जाते हैं।
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