बहराइच/बिछिया। सरयू नदी का जलस्तर भले ही इस समय खतरे के निशान से नीचे है, लेकिन कटान की रफ्तार ने किसानों और ग्रामीणों की कमर तोड़ दी है। खेत तेजी से नदी में समा रहे हैं। लहरें खेतों को अपने में समाहित करते हुए गांव की ओर बढ़ रही हैं। ग्रामीण अधिकारियों से गुहार लगा रहे हैं, लेकिन अब तक कटान रोकने का कोई उपाय नहीं किया गया।
मिहींपुरवा तहसील की ग्राम पंचायत जंगल गुलरिया के मजरा संपतपुरवा और महसी तहसील के महंतपुरवा गांव तेज कटान की चपेट में आ गए हैं। लोग असहाय होकर अपनी उपजाऊ जमीन को धारा में समाते देख रहे हैं।
जंगल गुलरिया गांव के प्रधान प्रतिनिधि शिव कुमार निषाद ने बताया कि बुधवार रात से लेकर बृहस्पतिवार दोपहर तक करीब 45 बीघा खेत नदी में समा गए। किसानों की साल भर की मेहनत एक झटके में नदी की लहरों में समा गई। उन्होंने कहा कि लगातार प्रशासन को अवगत कराने के बावजूद अब तक कोई रोकथाम कार्य शुरू नहीं हुआ है।
गांव के किसान रामअवध, राधेश्याम और फूलमती देवी का कहना है कि नदी हर साल जमीन छीन रही है। इस बार हालात और भी गंभीर हैं, क्योंकि नदी अब बस्ती की ओर तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि अगर कटान यूं ही जारी रहा, तो जल्द ही गांव का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा।
इधर, महसी तहसील के महंतपुरवा गांव की स्थिति भी अलग नहीं है। राजाराम ने बताया कि सरयू की लहरें अब गांव से कुछ ही दूरी पर रह गई हैं। हर दिन नदी का किनारा टूटता है और खेत धारा में समा जाते हैं। उन्होंने चिंता जताई कि अगर प्रशासन ने समय रहते कदम नहीं उठाया, तो पूरा गांव नदी की चपेट में आ सकता है।
केंद्रीय जल आयाेग के विशेषज्ञों का कहना है कि इस समय सरयू का जलस्तर एल्गिन ब्रिज पर खतरे के निशान से 30 सेमी नीचे है। पानी कम होने से नदी की धाराएं तेज हो जाती हैं, इससे कटान का असर और बढ़ जाता है।
उपजिलाधिकारी मिहींपुरवा प्रकाश सिंह ने बताया कि कटान की सूचना मिली है। राजस्वकर्मियों को मौके पर भेजा गया है। हालात पर नजर है। जिन ग्रामीणों के खेत या जमीनें कटान की चपेट में आएंगी, उन्हें मुआवजा दिया जाएगा।