बहराइच। तराई में मौसम ने शुक्रवार को फिर करवट बदला लिया है। बृहस्पतिवार रात से घना कोहरा छाया हुआ है। सुबह होते ही सड़कों, खेतों और रिहायशी इलाकों में कोहरे की मोटी चादर नजर आई। ठंड बढ़ने से आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित दिखा। न्यूनतम तापमान 4 डिग्री सेल्सियस पर स्थिर रहा, जबकि अधिकतम तापमान करीब 19 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ।
कोहरे के कारण शुक्रवार सुबह दृश्यता बेहद कम रही। हाईवे और ग्रामीण सड़कों पर वाहनों की रफ्तार थमी रही। कई स्थानों पर वाहन चालकों को हेडलाइट जलाकर चलना पड़ा। स्कूल जाने वाले बच्चों, दफ्तर जाने वाले कर्मचारियों और मजदूरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
ठंड का असर बाजारों पर भी साफ दिखाई दिया। बाजार देर से खुले और सड़कों पर चहल-पहल कम रही। लोग अलाव और ऊनी कपड़ों का सहारा लेते नजर आए। फुटपाथ पर रहने वाले और खुले में काम करने वाले लोगों के लिए ठंड सबसे बड़ी चुनौती बन गई है।
मौसम विशेषज्ञ डॉ. पीएल त्रिपाठी के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से तराई क्षेत्र में नमी बढ़ी है, जिसके चलते घना कोहरा छाया हुआ है। उन्होंने बताया कि अगले दो से तीन दिनों तक सुबह और रात के समय कोहरा बने रहने की संभावना है। ठंडी हवा के कारण तापमान में फिलहाल कोई खास बढ़ोतरी के आसार नहीं हैं।
बच्चों और बुजुर्गों का रखें खास ध्यान
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है। चिकित्सकों के अनुसार ठंड और कोहरे के कारण सर्दी, खांसी, जुकाम और सांस संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। लोगों को ऊनी कपड़े पहनने, सुबह-शाम अनावश्यक बाहर निकलने से बचने और गर्म पेय पदार्थ लेने की सलाह दी गई है।
ठंड, कोहरा और गलन से फसलों को खतरा
इस मौसम में आलू, सरसों, चना, मटर, मसूरव गेहूं की शुरुआती अवस्था की फसल को विशेष नुकसान हो सकता है। आलू की फसल में झुलसा रोग, सरसों में माहू (एफिड) और दलहनी फसलों में पत्ती धब्बा रोग की आशंका अधिक है। कृषि वैज्ञानिक सूर्यबली सिंह ने बताया कि सब्जी उत्पादक किसानों को भी सतर्क रहने की जरूरत है। टमाटर, मिर्च, बैंगन और फूलगोभी जैसी फसलें ठंड और कोहरे से प्रभावित हो सकती हैं, जिससे फूल और फल गिरने की समस्या बढ़ सकती है।
किसानों के लिए जरूरी सलाह
किसान खेतों में जल निकास की समुचित व्यवस्था रखें, ताकि नमी अधिक समय तक न बनी रहे। सुबह के समय जब कोहरा छंट जाए, तब हल्की सिंचाई करने से पाले का असर कम किया जा सकता है। खेतों की मेड़ों पर धुआं करें या सूखी घास जलाकर हल्का धुआं फैलाएं, जिससे तापमान में थोड़ी वृद्धि होती है और फसल सुरक्षित रहती है।