जरवल (बहराइच)। कस्बे में स्थित डिवाइन पब्लिक स्कूल में उर्दू काव्य गोष्ठी का आयोजन हुआ, जिसमें दूरदराज से आए शायरों ने गजल व शायरी पेश कर वाहवाही लूटी। कार्यक्रम देर रात तक चलता रहा। लोगों की काफी भीड़ रही।
जरवल में स्थित डिवाइन पब्लिक स्कूल में एक शाम शायरों के नाम उर्दू काव्य गोष्ठी का आयोजन हुआ, जिसकी अध्यक्षता शायर कैफ जरवली व संचालन जौक जरवली ने किया। मुख्य अतिथि शायर जमीर फैजी रहे। गोष्ठी का आरंभ फुरकान जरवली ने नात पाक से किया। तमाम शायरों ने रूमानी, इंकलाबी और इस्लाही गजलें पेश करके खूब वाहवाही लूटी। जमीर फैजी ने सुनाया, हुआ है हुक्म कि खुशियों को कम किया जाए, तो आओ दिल नहीं आंखों को नम किया जाए। कैफ जरवली ने पढ़ा, कैफ जिसकी हर इबारत खून से तहरीर थी, कोई कमरे से चुरा कर वह कहानी ले गया। शुजाअत ने पढ़ा, आ गए तुम तो महफिल में रौनक बढ़ी, तुम मगर आए इतनी गुजारिश के बाद। हफीज ने पढ़ा, आ गए सिनफ सारे तेरे हुस्न में, मीर की तू ग़जल वाकई हो गई।
जौक जरवली ने पढ़ा, कान नंगे हैं जो औरत के कोई बात नहीं, हाथ नंगे हैं तो फिर मर्द का होना क्या है। नीलेंद्र राना ने पढ़ा, अर्श से सजदों का मेरे यूं सिला मुझको मिला, रहमतें बरसीं तो फिर कशकोल छोटे पड़ गए। नजम जरवली ने पढ़ा, यूं ही दरिया में रौनक तो नहीं है, सदफ की गोद में कुछ पल रहा है। बेढ़ब जरवली ने पढ़ा, कि यकीनन किसी दिन मुंह सूजा मिलेगा, मेरे प्यार पे पहरेदारी बहुत है। आलम ने पढ़ा, वह खुश गुलू था मगर जहर फतह कर न सका, शिकस्त खा गई यक्लखत मखमली आवाज। इसके अलावा अरमान, फहीम ने भी शायरी पेश की। इस मौके पर इमरान आजाद, नफीस हाशमी, शाहिद मलिक, मास्टर आबिद, तौहीद आलम, उर्दू शोध छात्र नज्जमुज्मा आदि मौजूद रहे ।