बहराइच में पांच वर्ष की मासूम से दुष्कर्म के मामले में सुजौली गांव निवासी अविनाश पांडेय को विशेष न्यायाधीश पॉक्सो की अदालत ने बुधवार को चौथी बार आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने 2.40 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। इससे पहले भी अविनाश को मासूमों से दुष्कर्म के तीन मामलों में आजीवन कारावास की सजा सुनाई जा चुकी है।
पीड़िता की मां ने तीन जुलाई 2025 को सुजौली थाने में तहरीर दी थी। बताया था कि दो जुलाई की देर रात बच्चों के साथ खाना खाकर घर के आंगन में सो रही थी। नींद खुलने पर सबसे छोटी पांच वर्षीय बेटी बिस्तर पर नहीं मिली। काफी तलाश के बाद भी बच्ची का पता नहीं चला। पुलिस ने मामले में सुजौली गांव निवासी अविनाश पांडेय उर्फ सिप्पल के खिलाफ पॉक्सो अधिनियम में प्राथमिकी दर्ज कर विवेचना पूरी कर रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत की।
बुधवार को विशेष न्यायाधीश पॉक्सो अरविंद कुमार गौतम ने अभियोजन और बचाव पक्ष की दलील सुनने के बाद अविनाश को दोषी करार दिया। अभियोजन पक्ष ने दलील दी कि आरोपी का कृत्य अत्यंत गंभीर है और वह पूर्व में भी मासूमों के साथ इसी तरह के अपराध कर चुका है, जिनमें उसे तीन बार आजीवन कारावास की सजा मिल चुकी है। यह चौथा मामला है। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद अदालत ने अविनाश को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। जुर्माने की पूरी धनराशि पीड़ित मासूम के उपचार और पुनर्वास के लिए उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।
दुष्कर्मी को कब-कब मिला आजीवन कारावास
दुष्कर्मी अविनाश पांडेय उर्फ सिंपल को पहली बार 24 सितंबर को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। कोर्ट की यह सजा जिले में बीएनएस की धाराएं लागू होने के बाद पहली सजा थी। तत्कालीन विशेष न्यायाधीश पाक्सो दीपाकांत मणि की कोर्ट ने आरोपी को तीन बार सजा सुनाई थी। वहीं बुधवार को विशेष न्यायाधीश पाक्सो अरविंद कुमार गौतम ने चौथी बार दोषी को सजा सुनाई है। इसके अतिरिक्त और कोई मुकदमे शेष नहीं हैं।
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