सीतारामपुरवा में नहर के किनारे बनी झोपड़ी हटाते मुरली व उनका परिवार।
बिछिया। सरयू की कटान में पांच साल पहले घर-खेत गंवाने के बाद नहर किनारे झोपड़ी बनाकर रह रहे दो परिवारों को अब तेंदुए के डर से अपना आशियाना छोड़ना पड़ा है। कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग के सुजौली रेंज में 18 सितंबर को वृद्धा फूलवती की तेंदुए के हमले में मौत के दो दिन बाद सोमवार को बाजपुर बनकटी ग्राम पंचायत के सीताराम पुरवा में रह रहे मुरली और जानकी देवी के परिवारों ने झोपड़ियां हटा लीं। दोनों परिवार अब बड़खड़िया गांव में आबादी के बीच बसने की तैयारी कर रहे हैं। ग्राम प्रधान ने उन्हें ग्राम समाज की जमीन उपलब्ध कराई है।
18 सितंबर को सीताराम पुरवा में नहर किनारे झोपड़ी में रह रही फूलवती पर तेंदुए ने हमला कर दिया था। तेंदुआ उन्हें झोपड़ी से खींचकर पास के हल्दी के खेत में नाले के किनारे ले गया, जहां उनकी मौत हो गई थी। फूलवती की झोपड़ी के आसपास ही मुरली और जानकी देवी के परिवार भी रहते थे। घटना के बाद से दोनों परिवारों में दहशत बनी हुई थी।
मुरली और जानकी देवी ने बताया कि हर दिन तेंदुए की गुर्राहट सुनाई पड़ रही थी। नहर किनारे उनकी झोपड़ियों के आसपास दूर-दूर तक आबादी नहीं है। रात में तेंदुए के डर के बीच बच्चों और परिवार की सुरक्षा करना मुश्किल हो गया था। इसी वजह से उन्होंने आबादी के बीच रहने का फैसला किया। ग्राम प्रधान जयप्रकाश से बात करने के बाद बड़खड़िया में ग्राम समाज की जमीन उपलब्ध कराई गई है। अब दोनों परिवार वहीं झोपड़ी बनाकर रहेंगे।
पांच साल पहले कटान में उजड़ा था घर
मुरली और जानकी देवी मूलरूप से दूधनाथ पुरवा के रहने वाले हैं। करीब पांच वर्ष पहले सरयू की कटान में उनका घर और खेत तबाह हो गया था। इसके बाद दोनों परिवार बाजपुर बनकटी में सरयू नहर की पटरी के किनारे झोपड़ी बनाकर रहने लगे। अब तेंदुए के हमले ने उन्हें एक बार फिर अपना ठिकाना बदलने को मजबूर कर दिया है।