मिहीपुरवा। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मिहींपुरवा के ग्राम सेमरी मलमला स्थित स्वास्थ्य उपकेंद्र पर तैनात सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी पर लगे गंभीर आरोप सही पाए गए हैं। जांच में सामने आया है कि उपकेंद्र पर नाबालिग से मरीजों का इलाज कराया जा रहा था और सरकारी दवाओं के बजाय बाहर की दवाएं देकर उनसे पैसे वसूले जा रहे थे।
ग्रामीणों के अनुसार, उपकेंद्र पर तैनात शरीफ अहमद लंबे समय से इस तरह की गतिविधियां कर रहा था। आरोप है कि अपनी गैरमौजूदगी में वह एक किशोर से इलाज कराता था। सोमवार को गांव के एक युवक ने नाबालिग द्वारा इलाज करते और दवा के नाम पर पैसे लेते हुए वीडियो बनाया, जो वायरल हो गया। युवक का आरोप है कि सवाल करने पर संबंधित अधिकारी ने ऊपर तक रकम पहुंचाने की बात कही। इस मामले में जिलाधिकारी को भी कुछ ग्रामीणों ने वायरल वीडियो भेजकर शिकायत की थी।
उच्चाधिकारियों के निर्देश पर मंगलवार को मिहींपुरवा सीएचसी अधीक्षक डॉ. थानेदार ने उपकेंद्र पहुंचकर जांच की। जांच में वायरल वीडियो और बयानों के आधार पर लगाए गए आरोप सही पाए गए। जांच के दौरान यह भी पता चला कि संबंधित अधिकारी तीन दिन के अवकाश के बावजूद उपकेंद्र पर मौजूद था। इलाज कराने आईं कलपाती, सुदामी और सुमन ने बाहर की दवा देने, पैसे लेने और नाबालिग से इलाज कराने की पुष्टि की। सीएचसी अधीक्षक ने बताया कि पूरे मामले की रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी जा रही है। कार्रवाई का निर्णय वहीं से लिया जाएगा।