मोतीपुर रेंज के तुलसीपुरवा गांव में मंगलवार की रात जंगल से निकलकर एक बाघ पहुंच गया। उसने एक ग्रामीण के घर में घुसकर पालतू कुत्ते को निवाला बना लिया। परिवारीजनों ने अपने को कमरे में बंद कर जान बचाई। रात में गांव के लोग जब आग जलाकर हांका लगा रहे थे, तभी पुन: बाघ आ धमका। किसी तरह लोगों की जान बच सकी। इस मामले में रेंज कार्यालय पर सूचना दी गई, लेकिन कोई भी वनकर्मी मौके पर नहीं पहुंचा। गांव में दो बार बाघ के आने से ग्रामीणों में दहशत व्याप्त है।
कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र के मोतीपुर रेंज अंतर्गत तुलसीपुरवा गांव जंगल के निकट स्थित है। गांव के लोग मंगलवार रात अपने घरों में सो रहे थे। तभी जंगल से निकलकर आया बाघ गांव निवासी बीरबल के घर के आंगन में पहुंच गया। उसने बरामदे में बैठे कुत्ते पर हमला कर उसे निवाला बना लिया।
पास में बीरबल और परिवार के अन्य सदस्य सो रहे थे। बाघ की दहाड़ से सभी की नींद खुल गई। परिवारीजनों ने किसी तरह कमरे में घुसकर दरवाजा बंद कर अपनी जान बचाई। इसके बाद हांका लगाना शुरू किया। गांव के लोग भी हांका लगाने लगे, जिससे कुछ देर बाद बाघ चला गया। इस पर बीरबल व गांव के लोग एकत्रित हो गए। ग्रामीणों ने दो-तीन जगह आग जलाकर हांका लगाना शुरू किया।
रेंज कार्यालय को भी सूचना दी। भोर में करीब चार बजे जब ग्रामीण कुछ शांत हुए, तभी पुन: बाघ की दहाड़ सुनाई पड़ी। टार्च जलाने पर वह गांव की ओर आता दिखा। इस पर मशाल जलाकर सभी ने शोर मचाया। तब बाघ पास के गन्ने के खेत में चला गया।
बाघ के आने से पूरी रात गांव के लोग सो नहीं सके। सुबह पुन: रेंज कार्यालय को अवगत कराया गया, लेकिन कोई भी वनकर्मी मौके पर नहीं पहुंचा। इस पर जिला पंचायत सदस्य सतीश पोरवाल ने डीएफओ से शिकायत की है। डीएफओ जीपी सिंह का कहना है कि वन विभाग की टीम को मौके पर भेजा जा रहा है। ग्रामीणों को स्वयं भी सजगता बरतने की जरूरत है।