विकासखंड मिहींपुरवा में फकीरपुर-रमपुरवा मार्ग पर पीब्डल्यूडी विभाग द्वारा दो वर्ष पूर्व बरसाती नाले पर पुलिया निर्माण को हरी झंडी मिली थी लेकिन आधा बजट मिलने के चलते सिर्फ पुलिया की दीवार ही बन सकी थी। स्लैब नहीं डाली गई थी। इससे ग्रामीणों को आवागमन में दिक्कत हो रही थी।
ग्रामीणों ने कई बार प्रशासनिक अधिकारियों से आवाज उठाई, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। परेशान ग्रामीणों ने चंदा इकट्ठा कर बांस, बल्ली की सहायता से पुल की स्लैब दुरुस्त कर ली है। उसी पर आवागमन शुरू कर दिया है। गांव के विकास में प्रशासनिक अमला कितना सुस्त है।
इसकी बानगी देखनी है तो पहुंच जाइए मिहींपुरवा विकास खंड। यहां पर फकीरपुरी-रमपुरवा मार्ग पर स्थित बरसाती नाले पर दो वर्ष पूर्व पुल निर्माण को प्रशासन ने हरी झंडी दी थी। इसके लिए 16 लाख रुपये बजट निर्धारित किया गया था। आरके कंस्ट्रक्शन को निर्माण का जिम्मा मिला था लेकिन प्रशासन ने आधा बजट ही अवमुक्त किया।
आधा बजट अब तक फाइलों में कैद है। जिसके चलते कार्यदायी संस्था मजबूरी में पुल की दीवार बनाकर खिसक गई। पुल का निर्माण न होने से फकीरपुरी और रमपुरवा समेत आधा दर्जन गांवों के लोगों को बरसात के समय काफी दिक्कत होती थी।
इस बार फिर जब बरसात शुरू हुई तो गांव के लोगों ने तहसील और जिला प्रशासन के अधिकारियों को पत्र सौंपकर अधूरे पुल को पूरा करने की आवाज उठाई लेकिन आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला। इस पर परेशान गांव के निवासी सुशील गुप्ता, छोटू, विनोद कुमार, मदन प्रसाद, अनिल और थारू विकास मंच के कार्यकर्ताओं ने ग्रामीणों के सहयोग से चंदा इकट्ठा कर बांस, बल्ली का इंतजाम किया और पुल की लकड़ी की स्लैब तैयार कर ली। इसी के सहारे ग्रामीणों का आवागमन शुरू हुआ है।