गन्ना माफिया ने करीब आठ हजार फर्जी किसानों के नाम पर चीनी मिलों को गन्ना बेचकर करोड़ों का वारा-न्यारा किया है। इसका खुलासा यूनिक कोड के जरिए हुआ है। इसमें करीब पांच हजार किसान ऐसे हैं, जो वर्षों पूर्व मर चुके हैं। लेकिन गन्ना माफिया इनके सट्टे पर दूसरे गन्ना किसानों का हक मार रहे थे।
कोड के आधार पर जब सदस्यों की पड़ताल की गई तो फर्जी सदस्यों के नाम सामने आए। उनकी सदस्यता रद्द कर दी गई है। अब विभाग आगे की कार्रवाई की तैयारी कर रहा है। जिले में बहराइच, जरवलरोड व नानपारा सहकारी समिति है।
चीनी मिल को गन्ने की आपूर्ति करने के पहले किसान को संबंधित क्षेत्र की गन्ना विकास समिति का सदस्य होना पड़ता है। समिति का सचिव उनका पंजीकरण करता है। समिति के पास किसान का पूरा विवरण रहता है। इसी आधार पर किसानों को गन्ना आपूर्ति के लिए पर्ची जारी की जाती है। लेकिन इस व्यवस्था को धता बताते हुए गन्ना माफिया ने पूर्व के वर्षों में बड़ी संख्या में फर्जी सदस्यों के नाम जोड़ लिए।
फर्जी सदस्यों के नाम पर उन्होंने छोटे किसानों से कम कीमत पर गन्ना खरीद कर मिलों को अधिक कीमत पर आपूर्ति की। गन्ना विभाग इस फर्जीवाड़े को बखूबी जानता था, लेकिन लाखों सदस्यों के बीच फर्जी सदस्यों को ढूंढना बड़ी चुनौती थी। गन्ना विभाग ने माफिया के पर कतरने के लिए कई बार हाथ-पैर चलाए, लेकिन निराशा हाथ लगी।
आखिरकार गन्ना माफियाओं पर अंकुश के लिए यूनिक कोड हथियार खोज निकाला गया। वर्तमान पेराई सत्र में गन्ना विभाग ने जिले में यूनिक कोड के तहत सर्वे कराया तो चौंकाने वाले परिणाम सामने आए। यूनिक कोड में एक गन्ना किसान के गांव से लेकर जिले तक के विवरण का रिकॉर्ड तैयार किया गया।
यूनिक कोड लागू होने से पूर्व इन समितियों के एक लाख 51 हजार 35 किसान थे। लेकिन जब सर्वे हुआ तो 7 हजार 717 किसान फर्जी मिले। इनमें तकरीबन 4 हजार 887 किसान ऐसे मिले जो कई वर्ष पूर्व मर चुके हैं। सबसे अधिक मृतक किसानों की संख्या में नानपारा समिति में है।
यहां 2351 मृतक किसानों के नाम पर मिलों को अवैध तरीके से गन्ने की आपूर्ति हो रही थी। जरवलरोड समिति में 1927 और बहराइच गन्ना समिति में 609 मृतक किसानों का खुलासा हुआ है।
जिला गन्ना अधिकारी राम किशन ने बताया कि सर्वे में जिले के 7 हजार 717 ऐसे लोगों के नाम सामने आए हैं, जिनके जरिए अवैध तरीके से गन्ने की आपूर्ति की जा रही थी। समितियों के सचिवों ने इनके नाम हटा दिए हैं। पड़ताल की जा रही है कि वे कौन लोग हैं, जिनके जरिए इतनी बड़ी तादाद में गन्ना समितियों में फर्जी सदस्य बनाए गए।
नाम सामने आने पर कार्रवाई होगी। जिनके नाम पर डबल सट्टे चल रहे हैं, उन्हें समितियों ने नोटिस जारी किया है।
यूनिक कोड गन्ना विभाग द्वारा प्रदेश स्तर पर तैयार किया गया 11 अंकों का
विशेष कोड है। इसके जरिये गन्ना समितियों के फर्जी सदस्यों को आसानी से
पकड़ा जा सकता है। इसके पहले दो अंकों में जिले में परिवहन विभाग द्वारा
दिया गया अंक रहता है, जैसे बहराइच के लिए यह 40 है।
इसके बाद दो अंकों में
गन्ना समिति का कोड होता है। इसके बाद तीन अंकों में गांव का कोड होता है।
यह माना जाता है कि एक गन्ना समिति के एक हजार तक गांव आ सकते हैं, इसीलिए
यह कोड तीन अंकों का होता है। इसके बाद चार अंकों का कृषक कोड होता है।
ऐसे में हर किसान का एक अलग कोड है, जिसमें उसके जिले से लेकर गन्ना समिति,
गांव व उसका विवरण होता है। यह कोड फीड होते ही किसान का पूरा विवरण सामने
आ जाता है। ऐसे में अब फर्जी सदस्यों के बचने की कोई गुंजाइश ही नहीं
बचती।