सराफा व्यवसायियों की हड़ताल खत्म होने के चलते 43 दिन बाद बुधवार को सराफा बाजार की दुकाने जिले में दोपहर बाद खुलीं। जिसके चलते खरीदारी का दौर भी शुरू हो गया। पहले दिन लगभग 10 लाख का कारोबार होने का अनुमान लगाया जा रहा है।
हालांकि सामान्य दिनों की अपेक्षा सन्नाटा पसरा दिखा। दुकानें खुलने से सराफा व्यवसायियों के साथ ही ग्राहक भी खुश नजर आए। खरमास समाप्त तो जरूर हुआ, लेकिन सवा माह से चल रही बंदी का असर बाजार पर दिखा। अधिक भीड़भाड़ नहीं रही।
जिले के सराफा व्यवसायी सोने के जेवरात पर एक्साइज ड्यूटी बढ़ाने के विरोध में आंदोलित हैं। सराफा व्यवसायियों का आंदोलन 43 दिनों से चल रहा है। लेकिन अब तक सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया है। प्रांतीय व राष्ट्रीय नेतृत्व से वार्ता के बाद बुधवार दोपहर में सराफा व्यवसायियों ने हड़ताल स्थगित करने की घोषणा करते हुए अपने प्रतिष्ठान के ताले खोले।
इसके चलते सराफा बाजार में चहल-पहल दिखी। लेकिन हड़ताल खत्म होने का पहला दिन होने के चलते अधिक ग्राहक दुकानों पर नहीं पहुंचे। सराफा व्यवसायी पंकज कुमार, घनश्याम ने बताया कि सरकार जिस अंदाज में सराफा व्यवसायियों की मांगों पर अड़ी हुई है, यह उचित नहीं है।
सामान्य दिनों की अपेक्षा 10 फीसदी भी नहीं हुआ व्यवसाय
सराफा व्यापार मंडल के अध्यक्ष सुमित खन्ना ने कहा कि हड़ताल खत्म नहीं हुई है। स्थगित हुई है। 10 दिन का समय केंद्र सरकार को दिया गया है। अगर इस अवधि में सरकार ने उचित कदम न उठाया तो 25 अप्रैल से पुन: सराफा व्यवसायी हड़ताल पर चले जाएंगे। उन्होंने कहा कि दोपहर बाद सराफा के प्रतिष्ठान खुले हैं। ऐसे में 10 फीसदी भी व्यवसाय नहीं हुआ है। पूरे जिले की मानें तो हो सकता है 8-10 लाख का आंकड़ा ही पार हो। वैसे इतनी बिक्री भी मुश्किल है।