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Bahraich News: चित्तौरा झील के तट पर गूंजी सुहेलदेव की शौर्यगाथा

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महाराजा सुहेलदेव स्मारक स्थल पर रविवार को आयोजित विजयोत्सव। - फोटो : महाराजा सुहेलदेव स्मारक स्थल पर रविवार को आयोजित विजयोत्सव।
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चित्तौरा। जिले की चित्तौरा झील के तट पर रविवार को सुहेलदेव विजयोत्सव के तहत अखंड रामायण पाठ के समापन के बाद हवन-पूजन किया गया। इस अवसर पर विचार गोष्ठी और कवि सम्मेलन का भी आयोजन हुआ। महाराजा सुहेलदेव सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में कवियों और साहित्यकारों ने महाराजा सुहेलदेव की शौर्यगाथा का वर्णन किया।
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कार्यक्रम की अध्यक्षता सनातन समाज के वरिष्ठ नेता मेहरज ध्वज सिंह ने की। हनुमंतधाम के पीठाधीश्वर स्वामी विष्णु देवाचार्य मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन महामना मालवीय मिशन के अध्यक्ष एवं अधिवक्ता संजीव श्रीवास्तव ने किया। कार्यक्रम का शुभारंभ वरिष्ठ कवि रमेश तिवारी ने मां वीणावादिनी की वंदना से किया। इसके बाद कवि देशराज सिंह आजाद ने पढ़ा, रक्षार्थ हमको जागना होगा, मखमली बिस्तर सुखों को त्यागना होगा। कवि सोमेश सावन ने महाराजा सुहेलदेव को नमन करते हुए पढ़ा, इस माटी का हर रजकण ही चंदन है, आज सुहेलदेव जी को मेरा शत-शत वंदन है। वहीं, शैलेंद्र मिश्र ने पढ़ा अपनी माटी, अपना जनपद, अपना बहराइच प्यारा है, उसने मसूद का मर्दन कर गाजी का शीश उतारा है।

गुलाबचंद जायसवाल ने भी महाराजा सुहेलदेव के शौर्य को याद करते हुए अपनी रचना प्रस्तुत की। कवि सम्मेलन से पूर्व रविवार सुबह कार्यक्रम का आरंभ विधि-विधान से हवन-पूजन के साथ हुआ। इस दौरान उपस्थित लोगों ने राष्ट्ररक्षा और सनातन धर्म की रक्षा के लिए हवन कुंड में आहुतियां दीं। कार्यक्रम में संघ विचारक कृष्ण कुमार, भूपेंद्र सिंह, तरुण कुमार द्विवेदी, ओमप्रकाश सक्सेना, धर्मेंद्र राम सिंह, निशा शर्मा, कृष्ण मोहन गोयल समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
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