मिहींपुरवा। तराई की दशकों पुरानी रेल परियोजना अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। दुधवा राष्ट्रीय उद्यान और कतर्नियाघाट वन्यजीव क्षेत्र के भीतर से ब्रॉडगेज लाइन बिछाने का सपना भले ही पर्यावरणीय कारणों से अधूरा रह गया हो, लेकिन अब केंद्र सरकार ने जंगल के बजाय आबादी वाले वैकल्पिक मार्ग से नई रेल लाइन बिछाने की तैयारी शुरू कर दी है।
रेल मंत्रालय ने मैलानी-भीरा आमान परिवर्तन, भीरा-रायबोझा नई ब्रॉडगेज लाइन तथा नानपारा-रायबोझा गेज परिवर्तन के लिए फाइनल लोकेशन सर्वे (एफएलएस) और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने की मंजूरी दे दी है। इसके लिए 3.58 करोड़ रुपये भी स्वीकृत किए गए हैं।
नानपारा-मैलानी मीटरगेज रेलखंड के ब्रॉडगेज में परिवर्तन की मांग लंबे समय से उठती रही, लेकिन दुधवा और कतर्नियाघाट के संरक्षित वन क्षेत्र से होकर गुजरने वाले करीब 128 किलोमीटर हिस्से को पर्यावरण एवं वन मंत्रालय से अनुमति नहीं मिल सकी। इसके बाद रेलवे ने नया विकल्प तलाशते हुए जंगल से बाहर नई रेल लाइन का प्रस्ताव तैयार किया।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में लिखित उत्तर में बताया कि मैलानी-नानपारा मीटरगेज रेलमार्ग के स्थान पर वैकल्पिक ब्रॉडगेज संपर्क विकसित करने के लिए सर्वे कराया जाएगा। प्रस्तावित मार्ग दुधवा और कतर्नियाघाट के संवेदनशील वन क्षेत्र से बाहर रहेगा, जिससे वन्यजीव संरक्षण भी प्रभावित नहीं होगा और क्षेत्र को आधुनिक रेल सुविधा भी मिल सकेगी।
बहराइच सांसद डॉ. आनंद कुमार गोंड ने बताया कि सर्वे की मंजूरी मिलना क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि है। सर्वे पूरा होने के बाद नई रेल लाइन का अंतिम रूट तय होगा, ताकि अधिक से अधिक आबादी को इसका लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि परियोजना पूरी होने पर बहराइच, खीरी और नेपाल सीमा से जुड़े क्षेत्रों की रेल कनेक्टिविटी मजबूत होगी तथा व्यापार, पर्यटन और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
रेल मंत्रालय ने केवल नई लाइन के सर्वे को ही मंजूरी नहीं दी है, बल्कि वर्तमान मैलानी-नानपारा मीटरगेज ट्रैक के 109 किलोमीटर हिस्से के पूर्ण नवीनीकरण को भी स्वीकृति दी है। इससे छोटी लाइन की मौजूदा सेवा सुरक्षित और व्यवस्थित बनी रहेगी।
सूत्रों के अनुसार परियोजना के तहत रेलवे भूमि, लागत, तकनीकी व्यवहार्यता और रूट का विस्तृत अध्ययन करेगा। डीपीआर तैयार होने के बाद निर्माण की प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।