मिहीुपरवा। नानपारा रेंज में रेस्क्यू के दौरान हुई तेंदुए की मौत की गुत्थी सवालों में उलझती जा रही है। वन विभाग जहां तेंदुए की मौत डिहाइड्रेशन और निमोनिया से होने की बात कह रहा है, वहीं विशेषज्ञों का कहना है कि डिहाइड्रेशन से मौत होना संदिग्ध है। विसरा रिपोर्ट से ही तेंदुए की मौत का राजफाश हो सकेगा।
पूर्व प्रभागीय वनाधिकारी आनंद कुमार ने बातचीत में कहा कि निमोनिया की संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता, लेकिन डिहाइड्रेशन को मौत का कारण बताना सहज स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने अपने अनुभव का हवाला देते हुए बताया कि कार्यकाल के दौरान बाघ, तेंदुआ, भालू, हाथी और गैंडा सहित 100 से अधिक वन्यजीवों के पोस्टमार्टम कराए, परंतु किसी भी मामले में डिहाइड्रेशन को प्रमुख कारण के रूप में नहीं पाया गया।
उनके अनुसार निमोनिया के मामलों में श्वसन तंत्र में स्पष्ट लक्षण दिखाई देते हैं। नाक से गले तक बलगम, फेफड़ों में संक्रमण आदि रहता है। वहीं तेंदुआ एक शक्तिशाली और मांसाहारी वन्यजीव है, जिसका पाचन तंत्र मजबूत होता है। ऐसे जीव में अचानक डिहाइड्रेशन से मौत होना सामान्य परिस्थितियों में दुर्लभ माना जाता है।
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विसरा रिपोर्ट पर टिकीं नजरें
पूर्व डीएफओ ने स्पष्ट किया कि मौत के वास्तविक कारण का खुलासा केवल विसरा की रासायनिक जांच रिपोर्ट से ही संभव है। अंतिम रिपोर्ट आने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
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उठ रहे हैं सवाल:
-क्या स्वास्थ्य परीक्षण में देरी हुई?
-क्या परिवहन के दौरान आवश्यक सावधानियां बरती गईं?
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वन विभाग का पक्ष
डीएफओ सुंदरेशा ने कहा कि पूरी प्रक्रिया नियमानुसार की गई है और मामले की गहन जांच कराई जा रही है। अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की स्थिति साफ होगी।