इसे मजबूरी कहें या बोझ। जन्म देने वाली मां ने नवजात को जन्म लेते ही नाले में फेंक दिया। लेकिन सांस टूटने से पहले ही नाले में पड़ी नवजात को बच्चों ने देखकर शोर मचाया। आसपास के लोगों ने उसे बाहर निकाला तो मोहल्ले की ही रहने वाली मुन्नी ने नवजात को ममता की छांव दी। नवजात को अस्पताल पहुंचाकर इलाज कराया गया, फिर पुलिस और डॉक्टरों की लिखा-पढ़ी में गोद लिया। मुन्नी के सिर्फ बेेटे हैं, उनकी बेटियां नहीं हैं।
बेटियों के प्रति संवेदनहीनता थमने का नाम नहीं ले रही है। जन्म लेते ही उन्हें फेंका जा रहा है। कहीं पर मजबूरी होती है तो कहीं बेटियों को बोझ माना जाता है। शहर के नगर कोतवाली क्षेत्र के वशीरगंज मोहल्ले में स्थित एक धर्मस्थल के निकट नाले में सोमवार शाम को एक नवजात के रोने की आवाज आसपास खेल रहे बच्चों ने सुनी।
बच्चे आवाज की दिशा में आगे बढ़े तो नाले में एक नवजात कूड़े के ढेर पर पड़ी दिखी। इस पर बच्चों ने शोर मचाया तो मोहल्ले के लोग जुट गए। सूचना के बाद पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। मोहल्ले की ही निवासी मुन्नी पत्नी इसरार भी भीड़ देखकर पहुंची तो नवजात को कूड़े के ढेर पर देखकर सन्न रह गई।
उन्होंने आगे बढ़कर उसे गोद में ले लिया। साथ ही बच्ची के पालन-पोषण की बात कही। इस पर नगर कोतवाली पुलिस ने लिखा-पढ़ी करने के बाद नवजात को मुन्नी के सुपुर्द कर दिया। इसके बाद मुन्नी नवजात को लेकर जिला अस्पताल पहुंची, जहां डॉ. केके वर्मा ने इलाज शुरू किया। चिकित्सक के मुताबिक बच्ची स्वस्थ बताई जा रही है। नगर कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक जेएन शुक्ला का कहना है कि बच्ची को मुन्नी के सुपुर्द कर दिया गया है।