नेपाल सीमा से सटे बलई गांव के एक मकान में रविवार शाम को खाना बनाते समय अचानक आग लग गई। उस समय घर में मासूम बेटी के साथ सिर्फ मां थी। पहले तो महिला ने आग बुझाने की कोशिश की। सफल न होने पर घर का सामान समेटने लगी। तभी आग ने पूरे मकान को आगोश में ले लिया।
उसने मासूम बेटी के साथ मकान से बाहर निकलने की कोशिश की लेकिन तब तक दोनों आग से घिर चुकी थी। थोड़ी ही देर में मां-बेटी की जिंदा जलकर मौत हो गई। मोतीपुर थाना अंतर्गत बलई गांव नेपाल सीमा से सटा हुआ है। गांव निवासी राजू प्रसाद मजदूरी कर परिवार चलाता है।
रविवार सुबह राजू मजदूरी करने गया था। घर पर उसकी पत्नी (28) और बेटी रचना (4) थीं। दोपहर में घर का काम निपटाने के बाद बेटी रचना को चारपाई पर सुलाकर इंद्राणी खाना बनाने लगी। शाम चार बजे के आसपास इंद्राणी ने चावल पकाने के लिए चूल्हा जलाया तो उससे उठी तेज लपट से पास में रखे मेंथा ऑयल के डिब्बे में आग लग गई।
इंद्राणी ने शोर मचाते हुए आग बुझाने की कोशिश की। आग को काबू में न होते देख इंद्राणी सामान को समेटने में लग गई। लेकिन तभी आग ने पूरे मकान को आगोश में ले लिया। घर के बाहर खड़े लोगों ने उसे रोका लेकिन अंदर सो रही बेटी रचना की याद आते ही इंद्राणी फिर घर में घुस गई।
लेकिन तब तक घर के दरवाजे पर भी आग की लपटें आ गईं। जिससे वह बाहर नहीं निकल सकी। मां बेटी की जिंदा जलकर मौत हो गई। थानाध्यक्ष मोहम्मद यासीन ने बताया कि मां बेटी के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा जा रहा है।
बलई गांव भारत नेपाल की सीमा पर स्थित है। जंगल के बीच से रास्ता है। जो मार्ग है वह भी काफी खराब है। मोबाइल का नेटवर्क रहता नहीं है। दूरी अधिक है। नेटवर्क के अभाव में गांव के लोग चाह कर भी अग्निशमन विभाग को सूचना नहीं दे सके। इस कारण दमकल वाहन भी मौके पर नहीं पहुंच सका।