बहराइच। तराई क्षेत्र में ठंड बढ़ने के साथ ही बाल रोगियों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में रोजाना करीब 200 से 250 बच्चे इलाज के लिए आ रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि ज्यादातर बच्चे सर्दी-जुकाम, खांसी, बुखार और दस्त जैसी मौसमी बीमारियों से पीड़ित रहते हैं।
मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अरविंद शुक्ला ने बताया कि बदलते मौसम में बच्चों को विशेष देखभाल की जरूरत होती है। उन्होंने कहा कि सुबह-शाम की ठंड से बचाव के लिए बच्चों को गर्म कपड़े पहनाएं और ठंडी हवा से दूर रखें। अगर बच्चे को खांसी, बुखार, सांस तेज चलने या दस्त की शिकायत हो, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।
उन्होंने कहा कि इस मौसम में कोल्ड डायरिया और निमोनिया का खतरा ज्यादा रहता है। ऐसे में बच्चों को फुल आस्तीन के कपड़े पहनाएं, सिर ढककर रखें और नंगे पांव न चलने दें। साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देना भी जरूरी है।
छोटे बच्चों के लिए उन्होंने कंगारू मदर केयर की सलाह दी है, यानी मां बच्चे को अपने सीने से लगाए रखे ताकि उसे ठंड न लगे। उन्होंने कहा कि छह महीने तक बच्चे को सिर्फ मां का दूध ही देना चाहिए और सुबह की धूप जरूर दिखानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि थोड़ी सी सावधानी रखकर बच्चे को मौसम की बीमारियों से सुरक्षित रखा जा सकता है। परिवारों को चाहिए कि ठंड में बच्चों की देखभाल में किसी तरह की लापरवाही न करें।