सीएमओ कार्यालय सभागार मेंें नर्सिंग स्टाफ को प्रशिक्षण देते विशेषज्ञ। -स्रोत : विभाग
बहराइच। डब्ल्यूएचपी के सहयोग से स्टाफ नर्सों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय के धनवंतरि सभागार में बृहस्पतिवार को यह कार्यक्रम हुआ। इसकी अध्यक्षता मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संजय कुमार और जिला क्षयरोग अधिकारी डॉ. एमएल वर्मा ने की। प्रशिक्षण का उद्देश्य बच्चों में टीबी की जल्द पहचान और समय पर इलाज में स्टाफ नर्सों की भूमिका को मजबूत करना था।
प्रशिक्षण के दौरान डॉ. संजय कुमार ने गैस्ट्रिक एस्पिरेट टेस्ट (पेट से लिया गया तरल नमूना) और उससे होने वाली जांच की प्रक्रिया को सरल भाषा में समझाया। उन्होंने बताया कि छोटे बच्चों से बलगम का नमूना नहीं लिया जा सकता। इसलिए सुबह खाली पेट एक पतली नली से पेट का तरल पदार्थ निकाला जाता है। इस नमूने से टीबी की जांच की जाती है।
जिला क्षयरोग अधिकारी डॉ. वर्मा ने बाल टीबी जांच क्रम के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बच्चों में टीबी के लक्षण वयस्कों से भिन्न होते हैं। मास्टर ट्रेनर डॉ. पीके तिवारी ने बच्चों में टीबी की बुनियादी जानकारी प्रदान की।
वयस्कों से अलग होते हैं बच्चों में टीबी के लक्षण
बच्चों में टीबी के लक्षण वयस्कों से अलग होते हैं जैसे दो सप्ताह से अधिक समय तक खांसी, रात में बुखार बढ़ना, वजन कम होना, थकावट, सांस लेने में दिक्कत और गले या बगल की ग्रंथियों में सूजन। इसके अलावा कमजोरी, भूख न लगना और शरीर में दर्द जैसे संकेत भी दिख सकते हैं। ऐसे लक्षण दिखने पर बच्चे को तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए।
सीएचसी और मेडिकल कॉलेज की नर्सें हुईं प्रशिक्षित
इस प्रशिक्षण में जिले के सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों से आईं स्टाफ नर्सों और मेडिकल कॉलेज की नर्सों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में डब्ल्यूएचपी टीम से राज्य स्तरीय नर्स मेंटर दिलशाद बानो और जिला कार्यक्रम समन्वयक मनमोहन दीक्षित भी उपस्थित रहे।