करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी बहराइच शहर को ग्रीन क्लीन बनाने का सपना अधूरा ही रह गया है। भारत सरकार की ओर से जारी की गई रेटिंग में बहराइच शहर 429वें पायदान पर खड़ा नजर आ रहा है। बहराइच शहर में गंदगी को दूर करने के लिए चलाया जा रहा स्वच्छता अभियान भी बेअसर दिखाई दे रहा है। बहराइच में सफार्ई के लिए 2014 से अब तक करीब 35 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं।
केंद्र सरकार ने वर्ष 2014 में कामकाज संभालने के साथ ही देश में स्वच्छता को विकास का महत्वपूर्ण अंग बताया था। जिसके तहत पीएम मोदी द्वारा स्वच्छ भारत अभियान चलाया गया है।
केंद्र सरकार की ओर से गुरुवार को स्वच्छ भारत सर्वेक्षण 2017 की रिपोर्ट को जनता से साझा किया गया है। लेकिन इस रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश की स्थिति काफी चिंताजनक है। केंद्र सरकार की ओर से जिन 434 शहरों को सर्वेक्षण में शामिल किया गया है, उसमें उत्तर प्रदेश के 62 शहर हैं। बहराइच को इस सूची में 429वां स्थान मिला है। बहराइच से सटे गोंडा जनपद को उत्तर प्रदेश का सबसे गंदा शहर बताया गया है।
वहीं, बहराइच भी गंदगी के मामले में पीछे नहीं रहा है। हालांकि देवीपाटन मंडल में बहराइच की स्थिति काफी बेहतर रही है। लेकिन इसके बाद भी सूची में अंतिम पायदान पर होने से बहराइचवासियों को मायूसी हाथ लगी है।
अधिशासी अधिकारी नगर पालिका बहराइच पवन कुमार ने कहा कि बहराइच नगर पालिका क्षेत्र में सफाई व्यवस्था चुस्त-दुरुस्त करने के लिए जिलाधिकारी अजयदीप सिंह के निर्देश पर प्रतिदिन वार्डों में चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है।
सफाई निरीक्षक प्रदीप अग्निहोत्री की देखरेख में सभी सफाईकर्मी मुस्तैदी से काम कर रहे हैं। नगर मजिस्ट्रेट की ओर से नगर में चल रही सफाई कार्यों की समीक्षा भी की जा रही है। पूरे भारत में 429वें नंबर पर बहराइच शहर को रखा गया है, लेकिन जल्द ही इसमें और सुधार नजर आएगा।
इंसेट
नगर में सफाई व्यवस्था एक नजर में-
- शहर में वार्ड- 31
- सफाई नायक- 17
- सफाईकर्मी- 400
- बड़े नाले- 13
- छोटे नाले- 50
- शहर की आबादी- 5.50 लाख