श्रावस्ती। बरसात के बाद गुरुवार को राप्ती का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया। बैराज पर सुबह नौ बजे जलस्तर 127.80 मीटर मापा गया।
बढ़े जलस्तर की जानकारी के बाद डीएम सहित कई अधिकारियों ने जमुनहा लक्ष्मनपुर राप्ती बैराज का दौरा किया।
जिले भर में बुधवार रात से ही बरसात प्रारंभ हो गई थी। बरसात का सिलसिला गुरुवार सुबह तक जारी रहा। भारतीय व नेपाली क्षेत्र में लगातार दस घंटे तक हुई बरसात का असर राप्ती नदी में देखने को मिला।
गुरुवार सुबह राप्ती नदी अपने उफान पर थी। जमुनहा स्थित लक्ष्मनपुर राप्ती बैराज पर लिए गए माप के अनुसार राप्ती का जलस्तर 127.80 मापा गया।
जो कि खतरे के निशान से .10 मीटर ऊपर था। यहां खतरे का बिंदु 127.70 मीटर है। राप्ती के अचानक बढ़े जलस्तर के बाद जिला प्रशासन हरकत में आया। आसपास के गांवों को एहतियातन अलर्ट कर दिया गया।
वहीं बाढ़ चौकियों को भी संभावित खतरे के लिए तैयार किया गया। इस दौरान सुबह दस बजे जिलाधिकारी राघवेंद्र विक्रम सिंह ने जमुनहा तहसील क्षेत्र अंतर्गत लक्ष्मनपुर राप्ती बैराज पहुंच कर नदी की स्थिति का जायजा लिया।
वहीं संभावित खतरे को देखते हुए उप जिलाधिकारी इकौना यूसी उपाध्याय ने पुलिस क्षेत्राधिकारी इकौना के साथ तहसील क्षेत्र के मथुरा घाट, मझौवा सुमाल, अंधरपुरवा, बगहा गांव का दौरा कर बाढ़ की स्थिति का जायजा लिया। राप्ती नदी का जलस्तर दोपहर बाद स्थिर हो गया। हालांकि, कटान जारी है।
किसानों को मिली राहत
बरसात के कारण भले ही राप्ती नदी के कछार में बसे ग्रामीणों की धड़कने बढ़ गई हों। लेकिन इसका लाभ सभी किसानों को प्रत्यक्ष रूप से मिला है।
जहां एक दिन पूर्व पंपसेट से पानी सींच कर धान की रोपाई की जा रही थी। वहीं बरसात के बाद खेतों में लबालब पानी भरा हुआ है। जिसका फायदा उठाते हुए किसानों ने रोपाई प्रारंभ कर दी है।