बहराइच। ठंड बढ़ने के साथ ही बच्चे निमोनिया की जद में आने लगे हैं। मेडिकल कॉलेज में बृहस्पतिवार को निमोनिया, बुखार व जकड़न से पीड़ित पांच और बच्चों को भर्ती कराया गया। मेडिकल कॉलेज के विभिन्न ओपीडी में मरीजों की काफी भीड़ रही। लोग अपनी बारी आने का इंतजार करते नजर आए।
दोपहर 12 बजे फिजीशियन, पर्चा काउंटर, दवा काउंटर, पैथाेलॉजी, रेडियोलॉजी विभाग में मरीजों की भीड़ देखी गई। कमरा नंबर 18 के फिजीशियन ओपीडी में डॉ. अंशुमान मरीजों से घिरे रहे। मरीज सोनिका ने डॉक्टर को बताया कि कई दिनों से खांसी आ रही है। ब्लड प्रेशर व शुगर बढ़ गया है। इस पर उन्होंने जांच व दवाएं लिख दीं। 11 बजे पीआईसीयू में नवजात शिशु व बाल रोग विशेषज्ञ डॉ.एसके त्रिपाठी बच्चों का इलाज करते मिले। 12:30 बजे बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. मोहम्मद तबरेज भी बच्चों को देखते नजर आए। डॉ.त्रिपाठी ने बताया कि ठंड बढ़ने के साथ ही बच्चे निमोनिया की चपेट में आ रहे हैं।
ठंड में नवजात शिशुओं का रखें विशेष ख्याल: सीएमओ
सीएमओ डॉ. संजय कुमार शर्मा ने बताया कि ठंड में नवजात शिशुओं की देखभाल अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस दौरान शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। स्ट्रेप्टोकोकस निमोनिया और हेमोफिलुअस इन्फ्लुएंजा जैसे बैक्टीरिया अधिक सक्रिय हो जाते हैं जो निमोनिया जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बनते हैं। इसलिए माता-पिता शिशुओं की सुरक्षा के लिए विशेष सतर्कता बरतें। उन्होंने बताया कि ठंडी और सूखी हवा श्वसन तंत्र को कमजोर कर देती है जिससे सर्दी-जुकाम और फ्लू जैसी बीमारियां हो सकती हैं। ये बीमारियां फेफड़ों को कमजोर कर सकती हैं और निमोनिया में बदल सकती हैं। ठंड में लोग बंद कमरे में रहते हैं, जहां वेंटिलेशन की कमी और एक ही हवा का बार-बार उपयोग होता है। यह बैक्टीरिया और वायरस के प्रसार को बढ़ावा देता है।
कंगारू मदर केयर अपनाएं
सीएमओ ने ठंड से बचाव के लिए कंगारू मदर केयर को प्रभावी तरीका बताया। इसमें मां अपने शिशु को सीने से चिपकाकर गर्म रख सकती है। यह विशेष रूप से कम वजन और समय से पहले जन्मे शिशुओं के लिए बेहद उपयोगी है। कहा नवजात शिशुओं को हमेशा मुलायम और गर्म कपड़ों में लपेटकर, ऊनी टोपी, मोजे और दस्ताने पहनाकर रखें। हीटर या गर्म पानी की बोतलों का सीधा संपर्क शिशु से न होने दें।
टीकाकरण कराएं
निमोनिया से बचाव के लिए शिशु का नियमित टीकाकरण आवश्यक है जिसमें पेंटावैलेंट और पीसीवी वैक्सीन शामिल हैं। शिशु को पहले छह महीनों तक केवल स्तनपान कराएं, क्योंकि मां का दूध शिशु के लिए सबसे पोषक और रोग प्रतिरोधक होता है, जो उसकी इम्यूनिटी को मजबूत बनाता है और संक्रमण से बचाता है।
निमोनिया के लक्षण
-तेज सांस लेना, छाती का अंदर धंसना
सुस्ती, दूध न पी पाना, उल्टी करना या झटके आना