मिहींपुरवा। भरथापुर गांव के विस्थापन और पुनर्वास प्रक्रिया को लेकर प्रशासन एक बार फिर सक्रिय हो गया है। जिलाधिकारी के निर्देश पर राजस्व विभाग की टीम बुधवार को दावा सत्यापन फॉर्म लेकर भरथापुर पहुंची और पात्रता से संबंधित जानकारी जुटाई। निर्देश दिए गए थे कि यदि कोई पात्र व्यक्ति अब तक सूची से छूट गया हो, तो उसका दावा फॉर्म लेकर सत्यापन किया जाए।
पात्रता निर्धारण समिति की वर्ष 2024 में भेजी गई रिपोर्ट के अनुसार 118 परिवार पुनर्वास के लिए पात्र पाए गए थे, जिनके लिए सरकार द्वारा पुनर्वास राशि स्वीकृत कर दी गई थी। इसी बीच 29 अक्तूबर को कौड़ियाला नदी में ग्रामीणों से भरी नाव पलटने से नौ लोगों की मौत हो गई थी।
हादसे के बाद पीड़ितों से मिलने पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भरथापुर के निवासियों को सुरक्षित स्थान पर बसाने की घोषणा की थी। इसके बाद प्रशासन ने 136 परिवारों के विस्थापन की प्रक्रिया तेज कर दी। कोई भी पात्र परिवार छूट न जाए, इसे ध्यान में रखते हुए जिलाधिकारी के निर्देश के दो दिन बाद राजस्व एवं वन विभाग की संयुक्त टीम गांव पहुंची और दावा सत्यापन का कार्य शुरू किया।
सूत्रों के अनुसार अब तक करीब 60 ग्रामीणों ने स्वयं को भरथापुर का निवासी बताते हुए विस्थापन व पुनर्वास के लिए दावा फॉर्म जमा किया है, जिससे प्रशासन के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है। वहीं गांव के अमन मौर्य ने बताया कि उनके पिता का नाम विस्थापन एवं पुनर्वास सूची में शामिल है, लेकिन उनका और उनके चाचा का नाम सूची में नहीं है।
उन्होंने आरोप लगाया कि जब इस संबंध में एसडीएम से बात करने का प्रयास किया जाता है, तो संतोषजनक जवाब नहीं मिलता। दावा सत्यापन की इस प्रक्रिया से जहां कई परिवारों को उम्मीद जगी है, वहीं बढ़ती दावेदारी ने प्रशासन की मुश्किलें भी बढ़ा दी हैं। अब निगाहें अंतिम पात्रता सूची पर टिकी हैं, जिससे स्पष्ट होगा कि आखिर पुनर्वास का लाभ किन परिवारों को मिल पाएगा।