भिनगा तहसील में तैनात रजिस्ट्रार कानूनगो को गुरुवार को एंटी करप्सन लखनऊ और गोरखपुर की संयुक्त टीम ने रंगे हाथ पांच हजार रुपये रिश्वत लेते पकड़ लिया। भिनगा निवासी राजितराम गुप्ता ने रिश्वत मांगने की शिकायत की थी।
भिनगा तहसील में प्रदीप श्रीवास्तव रजिस्ट्रार कानूनगो पद पर तैनात हैं। इन्हें एक वर्ष पूर्व भिनगा के नई बाजार निवासी राजितराम गुप्ता पुत्र गुरुप्रसाद गुप्ता ने अपनी भूमि का 143 (कृषि भूमि को व्यावसायिक भूमि में परिवर्तित करने) के लिए आवेदन दिया था।
तभी से वह लगातार उससे पैसे की मांग कर रहे थे। कुछ दिन पूर्व प्रदीप श्रीवास्तव ने राजितराम गुप्ता से फाइल में स्वीकृति दिलवाने के लिए 15 हजार रुपये की मांग की थी। इस पैसे में पांच हजार रुपये उसे फाइल को आगे बढ़ाने के लिए देना था। इसके बाद पांच पांच हजार की दो किश्त और देनी थी। रुपये मांगने के बाद राजितराम गुप्ता ने एंटी करप्सन मुख्यालय लखनऊ से संपर्क कर अपनी शिकायती दर्ज कराई थी।
इस शिकायती पत्र के बाद गुरुवार को एंटी करप्सन टीम सीओ मिथिलेश दीक्षित की अगुवाई में जिनके साथ इंस्पेक्टर एके सिंह, इंस्पेक्टर अशोक कुमार बौद्ध प्रिय व गोरखपुर एंटी करप्सन की टीम प्रभारी निरीक्षक बब्बन यादव, हेड कांस्टेबल रफीक अहमद, शेषनाथ सिंह व कांस्टेबल शैलेंद्र कुमार राय के साथ मिल कर तहसील में जाल बिछाया। इस दौरान पूर्व में मांगे गए रिश्वत के पैसे को जैसे ही राजितराम गुप्ता ने आरके प्रदीप कुमार श्रीवास्तव के हाथ में दिए, वैसे ही टीम ने उन्हें रंगे हाथ पकड़ लिया।
पुलिस रिश्वत लेते पकड़े गए रजिस्ट्रार कानूनगो को कोतवाली भिनगा में दाखिल कर गोरखपुर अपने साथ ले गई है। वहीं, इस संबंध में शिकायतकर्ता राजितराम गुप्ता का कहना है कि उन्हें लगातार एक वर्ष से दौड़ाया जा रहा था। 15 हजार रुपये से कम पर काम करने को तैयार नहीं थे। बतौर रजिस्ट्रार कानूनगो पांच हजार रुपये उसे मिलना था। दस हजार रुपये तहसील के अन्य अधिकारियों को बंटना था।