बहराइच। जिले में ईंधन संकट दूसरे दिन और गहरा गया है। डीजल के बाद अब पेट्रोल की भी किल्लत शुरू हो गई है, जिससे हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। खेत से लेकर सड़क तक इसका सीधा असर दिख रहा है। बुधवार सुबह होते ही पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लगी रहीं, लेकिन टैंकर न पहुंचने से ज्यादातर लोग बिना तेल लिए लौटने को मजबूर हैं।
सबसे ज्यादा मार किसानों पर पड़ी है। गेहूं की कटाई के बाद मड़ाई और सब्जियों की सिंचाई के लिए डीजल न मिलने से ट्रैक्टर, इंजन और थ्रेशर ठप पड़ गए हैं। कई गांवों में फसल कटकर खेतों में पड़ी है, लेकिन डीजल के अभाव में आगे का काम नहीं हो पा रहा। किसान गैलन, पीपे और ड्रम लेकर एक पंप से दूसरे पंप तक भटकते नजर आ रहे हैं।
शहर और कस्बों में भी स्थिति चिंताजनक है। गोंडा रोड, डिगिहा, बौद्ध परिपथ समेत कई स्थानों पर पंप पूरी तरह सूखे रहे, जबकि चुंगी नाका के निकट इंडियन ऑयल पेट्रोल पंप पर टैंकर पहुंचते ही वाहनों की लंबी लाइन लग गई। शहर के कई पंपों पर सीमित मात्रा में पेट्रोल-डीजल दिया जा रहा है, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।
बौंडी प्रतिनिधि के अनुसार इलाके के पंपों पर दिनभर सन्नाटा पसरा रहा, वहीं पास के ही दूसरे पंपों पर भीड़ उमड़ पड़ी। रमपुरवा चौकी स्थित नीलकंठ पेट्रोल पंप पर जैसे ही टैंकर पहुंचा, बाइक, कार और ट्रैक्टरों की लंबी कतार लग गई। लोग डिब्बों में भी तेल भरवाते दिखे।
फखरपुर प्रतिनिधि के मुताबिक, मटेरा समेत ग्रामीण इलाकों में भी पंपों पर ‘नो स्टॉक’ के बोर्ड लगे हैं। इससे राहगीरों के साथ किसानों की परेशानी और बढ़ गई है। कई लोगों का कहना है कि मजबूरी में उन्हें महंगे दाम पर डिब्बों में ईंधन खरीदना पड़ रहा है। पंप संचालकों का कहना है कि डिपो से आपूर्ति बाधित होने के कारण यह संकट पैदा हुआ है। उधर जिलापूर्ति अधिकारी नरेंद्र तिवारी जल्द स्थिति सामान्य होने का दावा कर रहे हैं।
ईंधन संकट की मार से आम आदमी बेहाल
शहरा के कानूनगोपुरा निवासी संतोष कुमार ने बताया कि सुबह से दो-तीन पेट्रोल पंपों का चक्कर लगा चुके हैं, लेकिन कहीं पेट्रोल नहीं मिला। रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है। डिगिहा के रहने वाले राधेश्याम और जगदीश ने कहा कि बाइक में पेट्रोल खत्म होने वाला है, लेकिन घंटों लाइन में लगने के बाद भी नंबर नहीं आ रहा। घसियारीपुरा के निवासी रामलाल यादव ने बताया कि डीजल न मिलने से खेती का काम पूरी तरह रुक गया है। ट्रैक्टर खड़े हैं और फसल की मड़ाई नहीं हो पा रही। अगर जल्द तेल नहीं मिला तो भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।