जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा से आहत नेपाल सीमा पर स्थित भारतीय क्षेत्र के घुमनाभारू गांव के ग्रामीणों ने चुनाव के बहिष्कार का एलान कर दिया है। जगह-जगह जनप्रतिनिधियों का प्रवेश वर्जित लिखे बैनर लटका दिए हैं। ग्रामीणों को मनाने के लिए एसएसबी के असिस्टेंट कमांडेंट गांव पहुंचे तो उन्हें भी बैरंग लौटना पड़ा।
इस गांव में न तो रास्ता है, न ही चिकित्सा, स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली और परिवहन की सुविधा। गांव पूरी तरह अलग-थलग है। जैसे-तैसे लोग गुजर-बसर करते हैं। ऐसे में समस्याओं का समाधान होने तक सभी ने चुनाव में हिस्सा नहीं लेने का संकल्प लिया है।
मिहींपुरवा ब्लॉक का घुमनाभारू गांव नेपाल सीमा पर भारतीय क्षेत्र में स्थित है। ये गांव तीन तरफ से नेपाल की सीमा से घिरा है। जबकि चौथी ओर कतर्नियाघाट सेंक्चुरी का घना जंगल है। इस जंगल के बीच से होकर ही ग्रामीणों का रास्ता है। ग्रामीण जान जोखिम में डालकर इस रास्ते से आवागमन करते हैं।
गांव की आबादी 2200 है मगर यहां न तो बिजली पहुंच सकी और न ही स्वास्थ्य सेवाएं। उच्च शिक्षा व परिवहन सेवाएं भी नहीं हैं। गांव में लगे 20 हैंडपंप खराब पड़े हैं। ऐसे में गांव के लोग दुर्दिन में हैं। हर बार चुनाव में गांव के लोगों से वोट मांगने आने वाले नेताओं के आगे गुहार लगाई। मान मनौवल की।
सभी ने वायदे किये मगर चुनाव जीतने के बाद किनारा कस लिया। इसके चलते 17वीं विधानसभा चुनाव में सभी ने जनप्रतिनिधियों को सबक सिखाने की ठानी है। चुनाव की घोषणा होते ही ग्रामीणों ने भी चुनाव के बहिष्कार का एलान कर दिया।
गांव निवासी बालदेव प्रसाद, बेचन, महावीर, सरवन, रामबिलास, रवींद्र, अदालत प्रसाद आदि की अगुवाई में ग्रामीणों ने गांव के रास्तों पर जगह-जगह बैनर लटका दिए हैं। जिसमें गांव की समस्याओं का उल्लेख है। साथ ही जनप्रतिनिधियों का प्रवेश वर्जित लिखा है।
चुनाव बहिष्कार की सूचना पाकर एसएसबी के सहायक सेनानायक हरीश कुमार सिंह, इंस्पेक्टर जीडी जडेजा, सब इंस्पेक्टर इंद्रपाल, अमित कुमार आदि के साथ मंगलवार सुबह गांव पहुंचे। ग्रामीणों के साथ पंचायत कर उन्हें समझाने की कोशिश की। मगर ग्रामीणों ने दो टूक कहा कि जब तक समस्याएं नहीं दूर होंगी, चुनाव में हिस्सा नहीं लेंगे।