पयागपुर (बहराइच)। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पयागपुर में सोमवार को नसबंदी शिविर का आयोजन किया गया था। शिविर में तीन महिलाओं की नसबंदी की जा चुकी थी, लेकिन जब चौथी महिला की नसबंदी शुरू की गई तो चीरा लगाने के बाद लैप्रोस्कोपी मशीन ने काम करना बंद कर दिया। जिससे उसे टांका लगाकर मेडिकल कॉलेज बहराइच जाने की बात कहकर छोड़ दिया गया।
लैप्रोस्कोपी मशीन खराब होने से बीच में ही ऑपरेशन रोकने के कारण महिला अस्पताल में ही बेंच पर तड़पती रही। इसे लेकर लोगों ने हंगामा भी किया। स्वास्थ्य महकमे के अधिकारियों ने दूसरी मशीन मंगवाने के बाद ऑपरेशन करने की बात कही है।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पयागपुर में महिलाओं की नसबंदी किए जाने के लिए शिविर का आयोजन किया गया था। पयागपुर इलाके के विभिन्न गांवों से आशा बहुओं और एएनएम के माध्यम से महिलाओं को बुलाया गया था। शिविर में करीब आठ महिलाएं आई हुई थीं, जिनमें चार महिलाओं को नसबंदी किए जाने के लिए परीक्षण के बाद ऑपरेशन थियेटर ले जाया गया।
यहां चिकित्सक डॉ. जितेंद्र पांडेय ने ऑपरेशन शुरू किया। दो महिलाओं का ऑपरेशन वह कर चुके थे। तीसरी महिला का ऑपरेशन किया जा रहा था। तभी लैप्रोस्कोपी मशीन में कुछ समस्या पैदा हुई। लगभग डेढ़ घंटे तक उस महिला का ऑपरेशन किया गया। इसके बाद पयागपुर क्षेत्र के एक गांव की रहने वाली महिला को ऑपरेशन थियेटर के अंदर ले जाया गया। यहां डॉक्टर ने चीरा लगा दिया, लेकिन लैप्रोस्कोपी मशीन के खराब होने पर ध्यान ही नहीं दिया गया।
लैप्रोस्कोपी मशीन को जब लगाया गया तो पूरी तरह से उसके काम नहीं करने की बात सामने आई। इसके बाद चिकित्सक ने चीरे को टांका लगा दिया। महिला को नसबंदी के लिए मेडिकल कॉलेज बहराइच रेफर किया जा रहा था, मगर उसने वहां जाने में अक्षमता जतायी। इसके बाद वह बेंच पर ही पड़ी तड़पती रही, मगर ऑपरेशन करने से चिकित्सक ने हाथ खड़े कर दिए। इस पर महिला के पति समेत अन्य लोगों ने आक्रोश व्यक्त करते हुए हंगामा भी किया।
मंगवाएंगे दूसरी मशीन
सीएचसी में सोमवार को नसबंदी शिविर लगाया गया था। शिविर में तीन महिलाओं की नसबंदी की जा चुकी थी। चौथी महिला की नसबंदी होनी थी। मगर मशीन खराब हो गई। उसे बहराइच भेजा जा रहा था, मगर तीमारदार उसे ले जाने को तैयार ही नहीं थे। दूसरी मशीन मंगवाई जा रही है। इसके बाद फिर शिविर लगाकर ऑपरेशन किया जाएगा।
- डॉ. एनबी जायसवाल, अधीक्षक