बहराइच। गेरूआ नदी के ठीक सामने वन विभाग द्वारा बनवाए गए पांच थारू हट में अब सैलानी आराम नहीं फरमा सकेंगे। इन थारू हट को स्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। ये निर्णय वन विभाग ने सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश को देखते हुए उठाया है, जिसमें कहा गया था कि बाघों के प्राकृतिक वास वाली जगहों पर सैलानियों को न रखा जाए। थारू हट बंद करने के बाद विभाग ने इन्हें अधिकारियों के कैंप आवास में तब्दील कर दिया है।
कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र बहराइच के पर्यटन स्थानों में अपना सर्वोच्च स्थान रखता है। यहां आने वाले सैलानी थारू हट में रुककर आराम फरमाने के साथ ही जंगल की प्राकृतिक छटा का आनंद लेते हैं। वन क्षेत्र में सात थारू हट का निर्माण कराया गया था। जिनमें से पांच थारू हट कतर्निया रेंज के अंतर्गत गेरूआ नदी के सामने घड़ियाल सेंटर के पास स्थित हैं। मगर अब इनको वन विभाग के अधिकारियों के कैंप आवास में बदल दिया गया है।
कारण ये है कि सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि बाघों के प्रवास वाले स्थान पर सैलानियों को रात्रि विश्राम की सुविधा न प्रदान की जाए। इसी के तहत वन विभाग ने यह कदम उठाया है। अब कतर्निया घाट स्थित दो अन्य थारू हट और अलग से बनाए गए वन निगम के रेस्ट हाउस में ही सैलानी रुक सकेंगे।
उप प्रभागीय वनाधिकारी यशवंत ने बताया कि थारू हट बंद होने से सैलानियों को किसी प्रकार की समस्या नहीं होने दी जाएगी। चहलवा व सिरसियनपुरवा में दो होम स्टे बने हैं। सैलानी इनकी बुकिंग ऑनलाइन कर सकते हैं। इससे होम स्टे की योजना को भी बढ़ावा मिलेगा। जिन पांच थारू हट को बंद किया गया है। उनकी जगह पर अब फील्ड डायरेक्टर कैंप आवास, डीएफओ कैंप आवास, वार्डन/एसडीओ कैंप आवास, रिसर्चर हट प्रथम व द्वितीय बनाए गए हैं।