बहराइच। पिछले वर्ष जिले में रोपे गए पौधों का पता नहीं और इस बार फिर से करीब 75 लाख पौधरोपण की तैयारी चल रही है। इस पौधरोपण के लिए जिले में करीब 24 हजार 665 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता होगी। जबकि इतनी ही भूमि पर विगत वर्ष रोपण किया जा चुका है। ऐसे में यदि तीन वर्ष जिले में कराए गए पौधरोपण का आंकड़ा देख ले तो अब जिले में कही भी आबादी के लिए जमीन बची ही नहीं है।
जुलाई माह में पर्यावरण संतुलन के लिए हर वर्ष पौधरोपण होता है, लेकिन किए गए पौधरोपण और जिले में मौजूद खाली भूमि के बीच के आंकड़ों का संतुलन नही बैठ पा रहा है। शनिवार डीएम मोनिका रानी की अध्यक्षता में जिला वृक्षारोपण समिति एवं जिला गंगा संरक्षण समिति की बैठक में वन विभाग ने जो आंकड़ा पेश किया वह जमीनी हकीकत से मेल नही खाता है।
वन विभाग के मुताबिक इस वर्ष जिले को करीब 75 लाखा पौधरोपण का लक्ष्य दिया गया है। इसमें से अन्य विभागों के लिए लक्ष्य 45 लाख आठ हजार पौध रोपण का है। जबकि वन विभाग के लिए यह आंकड़ा दोनों डिविजन के लिए अलग-अलग है। बहराइच वन प्रभाग के लिए इस वर्ष बीस लाख 51 हजार पौध रोपण व कतर्नियाघाट वन्य जीव विहार के लिए 9 लाख 52 हजार पौध रोपड़ का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस लक्ष्य के सापेक्ष यदि जहां पौध का रोपण किया जाना है। उसकी उपलब्धता को देखे तो वन विभाग को एक हेक्टेयर में 1600 पौध का रोपण करना है। ऐसे में वन विभाग को ही करीब 29 लाख 102 पौध का रोपण करना है। इसके लिए उन्हें ही करीब 1812.56 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता होगी।
अन्य विभागों के लिए एक हेक्टेयर में दो हजार पौध रोपण का नियम है। ऐसे में इन्हें भी 45 हजार आठ हजार पौध के लिए 2250 हेक्टेयर खाली भूमि की आवश्यकता होगी।
10 फीसदी पौधे सूखने का दावा
वन विभाग जितने भी पौध प्रति वर्ष लगाता है। उसमें से केवल 10 प्रतिशत पौध के स्थान पर पुनः पौधरोपण हो सकता है। जबकि कितनी भूमि में कितना पौधरोपण होना है इसका भी शासन से नियम निर्धारित है। विगत वर्ष यह आंकड़ा प्रति हेक्टेयर 1100 पौध का था। इस वर्ष सघन पौधरोपण के लिए 1600 पौध प्रति हेक्टेयर कर दिया गया।
यह मुद्दा गहनता से देखने लायक है। विगत वर्ष व इस वर्ष होने वाले पौधरोपण की जांच कराई जाएगी। इसी के बाद स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। -मोनिका रानी, डीएम