बहराइच। मेडिकल कॉलेज के महिला विंग में इलाज के लिए आई विशेश्वरगंज के अमराई निवासी गर्भवती के इलाज में बरती गई लापरवाही का प्रकरण प्रमुख सचिव स्वास्थ्य तक पहुंच गया है। प्रमुख सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने प्रकरण की जांच के लिए महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा किंजल सिंह की अध्यक्षता में विशेष सचिव चिकित्सा शिक्षा कृतिका शर्मा व आरएमएल की प्रोफेसर डॉ. नीतू सिंह की तीन सदस्यीय टीम का गठन किया है। टीम 15 दिन में प्रकरण की जांच कर रिपोर्ट सौंपेंगी।
विशेश्वरगंज विकासखंड के अमराई निवासी उमेश कुमार ने 12 जुलाई को अपनी गर्भवती पत्नी बसंती कुमारी को प्रसव पीड़ा होने पर मेडिकल काॅलेज में भर्ती करवाया था। उमेश का आरोप था कि पत्नी को तीन बजे भर्ती करने के बाद 10 बजे तक कोई इलाज नहीं किया गया, जिससे हालत नाजुक हो गई।
इस पर उमेश ने क्षेत्रीय विधायक सुभाष त्रिपाठी को फोन पर सूचना दी और मदद की गुहार लगाई। विधायक सुभाष त्रिपाठी के फोन करने पर भी अस्पताल के कर्मचारियों ने कोई बात नहीं की, जिसके बाद पत्नी को निजी चिकित्सालय लेकर गए, तब पत्नी की जान बची। इलाज में उनके 30 हजार रुपये भी खर्च हुए। उमेश ने शासन व विधायक को पत्राचार कर निष्पक्ष जांच व लापरवाह कार्मिकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।
प्राचार्य ने भी नहीं दिया कोई ध्यान : विधायक
विधायक सुभाष त्रिपाठी ने बताया कि उमेश की शिकायत पर उन्होंने मौजूद चिकित्सक अंजू श्रीवास्तव से फोन पर बात की, लेकिन उन्होंने कोई सुनवाई नहीं की। इस पर मैंने प्राचार्य डॉ. संजय खत्री को फोन कर महिला के प्रसव पीड़ा व गंभीरता के संबंध में बताया, लेकिन प्राचार्य ने पीड़िता की कोई मदद नहीं की। इसके चलते उमेश को अपनी पत्नी की जान बचाने के लिए प्राइवेट अस्पताल का रुख करना पड़ा। विधायक ने बताया कि मेडिकल कॉलेज में आए दिन ऐसी घटनाएं हो रही हैं, जिसके चलते मरीजों को निजी अस्पताल का रुख करना पड़ रहा है। इसे देखते हुए लापरवाही बरतने वाले चिकित्सक व संबंधित अन्य लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।