फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Bahraich News: उपेक्षा ने छीनी झील की चमक, संकट में ताल बघैल

Sat, 17 Jan 2026 02:27 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
विज्ञापन
पयागपुर स्थित बघैल झील।     -संवाद
विज्ञापन
पयागपुर। प्रदेश के सबसे बड़े वेटलैंड्स (आर्द्रभूमि) में से एक ताल बघैल झील आज सरकारी उपेक्षा के कारण अपना वजूद खो रही है। यह झील कभी अपने प्राकृतिक सौंदर्य, जलीय उत्पादों और सर्दियों में आने वाले साइबेरियन पक्षियों के लिए विख्यात थी, लेकिन अब अतिक्रमण और संरक्षण के अभाव में धीरे-धीरे सिमटती जा रही है।
विज्ञापन


लगभग 42 किलोमीटर की परिधि में फैली यह विशाल झील कभी क्षेत्र की शान हुआ करती थी। अब इसके तटों पर अवैध कब्जे बढ़ गए हैं और लोगों ने वहां खेती करना शुरू कर दिया है। इसके अलावा, विदेशी पक्षियों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम न होने और अवैध शिकार की घटनाओं के कारण अब साइबेरियन पक्षी यहां आने से कतराने लगे हैं। जो झील कभी पक्षियों के कलरव से गूंजती थी, वहां अब सन्नाटा पसरने लगा है।

झील की नियमित सफाई न होने से जगह-जगह गाद (सिल्ट) जमा हो गई है। इसके कारण न केवल झील का आकार छोटा हो रहा है, बल्कि बारिश के पानी का भंडारण भी प्रभावित हो रहा है। यदि समय रहते इस ओर ध्यान नहीं दिया गया, तो प्राकृतिक संपदा से भरपूर यह झील केवल दस्तावेजों तक सीमित रह जाएगी।
विज्ञापन




शीतकालीन प्रवासी पक्षियों का था पसंदीदा ठिकाना

सर्दियों का मौसम शुरू होते ही नवंबर से जनवरी तक ताल बघैल विदेशी और साइबेरियन पक्षियों का पसंदीदा बसेरा हुआ करती थी। यहां लालसर, पिनटेल, मलार्ड, सिपर, सैंड पाइपर, गेलाश गोल्ड, काटन रील, सुरखाब, स्नेक बर्ड, रिंग फ्लावर, ग्रेहान, पेंटेड स्टार्क, परविल और साइबेरियन सारस जैसी 100 से अधिक प्रजातियों के पक्षी डेरा डालते थे। झील का कोना-कोना इनके कलरव से गूंज उठता था। लेकिन अतिक्रमण और अवैध शिकार की घटनाओं के कारण अब इन विदेशी मेहमानों ने यहां से मुंह मोड़ लिया है।



जलीय उत्पादों पर भी असर
ताल बघैल अपने औषधीय और जलीय उत्पादों के लिए भी प्रसिद्ध रही है। यहां विभिन्न प्रजातियों की मछलियां पाई जाती हैं। झील से प्राप्त होने वाले कमल गट्टा और कमल की जड़ (भसीड़) का उपयोग स्वादिष्ट सब्जी के रूप में किया जाता है। इसके अलावा, यहां प्राकृतिक रूप से उगने वाला तिन्नी का चावल व्रत और फलाहार के लिए क्षेत्र भर में अत्यंत लोकप्रिय है। परंतु, वर्तमान में झील में जमा सिल्ट और गिरते जलस्तर का असर इन जलीय उत्पादों पर पड़ रहा है। संसाधनों की कमी के कारण अब इनकी पैदावार निरंतर घटती जा रही है, जिससे स्थानीय लोगों की आजीविका पर भी संकट मंडरा रहा है।




झील को पर्यटन मानचित्र पर लाने का है प्रयास

पयागपुर के एसडीएम अश्विनी कुमार पांडेय ने बताया कि झील को सुरक्षित करने के लिए उसकी सीमाओं पर अतिक्रमण रोधी पिलर लगवाए गए हैं। ताल बघैल को पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने के लिए एक विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेज दिया गया है। बजट स्वीकृत होते ही झील के संरक्षण और सौंदर्यीकरण का कार्य शुरू हो जाएगा। इससे न केवल प्राकृतिक धरोहर को बचाया जा सकेगा, बल्कि क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा मिलने से स्थानीय स्तर पर रोजगार और विकास के नए अवसर भी सृजित होंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें