तेजवापुर(बहराइच)। विकास खंड क्षेत्र के रमपुरवा में आयोजित होने वाली रामलीला हर साल गंगा जमुनी तहजीब की मिसाल पेश करती है। यहां मुस्लिम समुदाय के लोग बुराई के प्रतीक रावण व कुंभकर्ण के पुतले तैयार करते है। ये परंपरा सैकड़ों सालों से चली आ रही है और मुस्लिम समाज की तीसरी पीढ़ी इस बार पुतला बनाने में जुटी हुई है। इस बार मुस्लिम समुदाय के बनाए गए 40 फीट का रावण दहन किया जाएगा।
विजय दशमी पर रमपुरवा रामलीला मैदान पर इस बार 40 फीट के रावण का पुतला का दहन किया जाएगा। इसको लेकर वर्षों से चली आ रही परंपरा के तहत मुस्लिम समाज के लोग तेजी से पुतला निर्माण में जुटे हैं। रामलीला कमेटी के अध्यक्ष राधेमोहन अवस्थी उर्फ छोटकऊ ने बताया कि शुरू में गांव निवासी बकरीदी व बाबू पुतलों को बनाया करते हैं। इसके बाद उनके परिवार के ही फकीर अहमद ने कमान संभाली। पिछले लगभग दो दशक से इसी परिवार के शरीफ इस काम को संभाल रहे हैं।
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पिता से सीखा था काम
फकीर अहमद (60) ने बताया कि उन्होंनेे पुतला बनाने का काम अपने पिता बाबू अहमद से सीखा था। उनके पिता ही पहले पुतला बनाते थे। पिता के इंतकाल के बाद अब वो और उनके बेटे इस काम में लगे है। लल्लू ने बताया कि उन्होंने यह कार्य फकीर अहमद के सहयोग से करते हैं। उन्हीं से सीखा हैं। शरीफ ने बताया की करीब 25 वर्षो से इस कार्य में लगे हुए हैं।
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इन सामानों से हो रहा 40 फीट पुतले का निर्माण
कारीगर फकीर अहमद ने बताया कि 40 फीट के रावण और 35 फीट के कुंभकरण के पुतले को तैयार किया जा रहा है। एक माह में पुतले का निर्माण होता है। जिसमें लगभग 120 लकड़ी के बांस, मैदा, साबूदाने, शरीर बनाने में काले रंग के कागज व चेहरा बनाने में रंगीन कागज, कपड़ा, पटाखों का इस्तेमाल किया जाता है।
संवाद