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Bahraich News: मोतीपुर-मुर्तिहा के रेंजर की कुर्सी खाली, तेंदुओं के बढ़ रहे हमले

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मिहींपुरवा। कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग में तेंदुओं व अन्य हिंसक वन्यजीवों की लगातार बढ़ती गतिविधियों के बीच मोतीपुर और मुर्तिहा रेंज में वन क्षेत्राधिकारी के पद एक माह से अधिक समय से खाली हैं। दोनों संवेदनशील और बड़े क्षेत्रफल वाली रेंजों का संचालन अतिरिक्त प्रभार के भरोसे किया जा रहा है। ऐसे में वन्यजीवों की निगरानी, नियमित गश्त और ग्रामीणों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
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करीब दो माह पूर्व वन विभाग ने वन क्षेत्राधिकारियों के तबादले बड़े पैमाने पर किए थे। कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग की सात रेंजों में से पांच के वन क्षेत्राधिकारियों का स्थानांतरण हुआ था। इनमें मोतीपुर के वन क्षेत्राधिकारी सुरेंद्र कुमार तिवारी और मुर्तिहा के वन क्षेत्राधिकारी रत्नेश कुमार भी शामिल थे। दोनों के गैरजनपद स्थानांतरण के बाद अब तक इन रेंजों में स्थायी तैनाती नहीं हो सकी है।

मोतीपुर रेंज का अतिरिक्त प्रभार ककरहा के वन क्षेत्राधिकारी केके सिंह को दिया गया है, जबकि मुर्तिहा रेंज की जिम्मेदारी धर्मापुर के वन क्षेत्राधिकारी दीपक मिश्रा संभाल रहे हैं। दोनों अधिकारियों को अपने मूल क्षेत्र के साथ अतिरिक्त रेंज की जिम्मेदारी भी निभानी पड़ रही है। ऐसे में दोनों रेंजों में नियमित निगरानी और वन्यजीवों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखना चुनौती बना हुआ है। हालांकि इस मामले में डीएफओ अपूर्व दीक्षित का कहना है कि उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा गया है।
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आबादी में पहुंच रहे तेंदुए
कतर्नियाघाट जंगल से सटे आबादी वाले इलाकों में तेंदुओं की आवाजाही और हमले की घटनाएं बढ़ी हैं। जंगल से सटे गांवों में ग्रामीणों के बीच वन्यजीवों का भय बना हुआ है। ऐसे समय में संवेदनशील रेंजों में स्थायी रेंजर न होने से ग्रामीणों की चिंता और बढ़ गई है। वन्यजीव के हमले व आबादी में आने की सूचना पर तत्काल मौके पर पहुंचना, गश्त बढ़ाना, ग्रामीणों को सतर्क करना और जरूरत पड़ने पर पिंजरा लगाने जैसे कार्यों के लिए स्थानीय स्तर पर प्रभावी निगरानी जरूरी होती है। अतिरिक्त प्रभार की व्यवस्था में अधिकारियों पर काम का दबाव बढ़ने से यह व्यवस्थाउं भी प्रभावित हैं।
इनसेट
जल्द स्थायी तैनाती की मांग
मोतीपुर और मुर्तिहा दोनों रेंज जंगल से सटे बड़े आबादी वाले क्षेत्रों को कवर करती हैं। वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए ग्रामीण राम पदारथ, लक्ष्मण प्रसाद, नंद किशोर आदि ने दोनों रेंजों में जल्द स्थायी वन क्षेत्राधिकारियों की तैनाती की मांग की है, ताकि वन्यजीवों की निगरानी और ग्रामीणों की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जा सके।
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