मिहींपुरवा। भारत–नेपाल सीमा से सटे इलाकों में फर्जी जन्म प्रमाणपत्र और आधार कार्ड बनाने वाले संगठित गिरोह के खुलासे के बाद जांच एजेंसियों ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। गिरोह की ओर से तैयार किए गए 19 हजार से अधिक आधार कार्ड पुलिस के रडार पर हैं। जांच का फोकस इस बात पर है कि अब तक बनाए गए हजारों आधार कार्डों में कितने कूटरचित दस्तावेजों से तैयार हुए और कितने नेपाली नागरिकों के नाम पर बनाए गए हैं।
जांच अधिकारियों के अनुसार, गिरोह साइबर तकनीक और फर्जी पोर्टलों के जरिये पहले डिजिटल रूप से कूटरचित जन्म और निवास प्रमाणपत्र तैयार करता था। उसके बाद इन्हीं दस्तावेजों के सहारे आधार कार्ड बनवाए जाते थे। हर एक आधार कार्ड या उसके संशोधन के बदले एक हजार से लेकर पांच हजार रुपये तक की वसूली की जाती थी।
पुलिस का कहना है कि आरोपियों से बरामद लैपटॉप, मोबाइल, बायोमीट्रिक उपकरण और डिजिटल डेटा का फोरेंसिक परीक्षण कराया जा रहा है। इसमें समय लगेगा, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट हो जाएगा कि किन-किन जनसेवा केंद्रों और तकनीकी सहयोगियों की भूमिका इस पूरे नेटवर्क में रही है। जांच पूरी होने के बाद न केवल गिरोह के अन्य सदस्यों, बल्कि फर्जी आधार कार्ड का इस्तेमाल करने वालों पर भी कार्रवाई हो सकेगी।
अभी तक की जांच में सामने आया है कि गिरोह में शामिल लोग यूआईडीएआई की वेबसाइट पर फर्जी कागजात अपलोड कर फिंगरप्रिंट और रेटिना स्कैन के जरिये आधार कार्ड बनवा लेते थे। चौंकाने वाली बात यह रही कि ये फर्जी दस्तावेज सामान्य जांच में भी पकड़ में नहीं आ रहे थे, जिससे गिरोह लंबे समय तक बेखौफ काम करता रहा।
अब तक पकड़े गए हैं ये
29 अक्तूबर को एसटीएफ और मुर्तिहा पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में ग्राम चुरवा से सोनू, अखंड प्रताप सिंह, राम निवास और नफीस को आधार बनाने के उपकरणों के साथ गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। इसके बाद शुक्रवार को गिरोह का सरगना प्रमोद निषाद नेपाल भागते समय एसटीएफ के हत्थे चढ़ा।
19 हजार से अधिक आधार कार्डों की होगी जांच
पुलिस क्षेत्राधिकारी मिहींपुरवा प्रद्युम्न सिंह के अनुसार, आरोपियों के बयान और बरामद तकनीकी उपकरणों से करीब 19 हजार आधार कार्ड बनाए जाने की जानकारी मिली है। यह संख्या और बढ़ सकती है। सभी मामलों की गहन तकनीकी जांच कर यह पता लगाया जा रहा है कि कितने आधार फर्जी दस्तावेजों से बने हैं और कितने नेपाली नागरिकों के नाम पर दर्ज हैं।