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नेताओं को भा रही मसलिन खादी की पोशाक

Thu, 16 Feb 2017 11:52 PM IST
अमर उजाला/बहराइच
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खादी के कपड़े खरीदते लाोग - फोटो : अमर उजाला
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खादी की पोशाक शान और रुतबे को दर्शाती है। चुनावी तैयारियों में जुटे नेताओं ने बंगाल से आने वाली मसलिन खादी के कपड़ों की पोशाक को तरजीह दी है। इसकी शर्ट और पैंट आरामदेह होती है। दो माह पूर्व से ही नेताओं ने इसकी तैयारियां शुरू कर दी हैं। हालांकि यहां पर आम जनता भी खादी के सामान को खरीदने में काफी जागरूक दिखाई देती है। 
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चुनावी मैदान में उतरने के लगभग छह महीने पहले से नेता अपनी पोशाकों पर काम करना शुरू कर देते हैं। नेताओं में खादी में मसलिन और खादी जैसा दिखने वाले लेनिन कपड़े के प्रति दीवानगी सिर चढ़कर बोलती है। चूंकि मसलिन और लेनिन से बने झक सफेद कुर्ते, पायजामे व सदरी जनता के बीच पहुंचे नेताओं को एक रॉयल लुक देती है, इसलिए नेता इन्हें पहनना ज्यादा पसंद करते हैं।

बहराइच के पीपल तिराहा स्थित गांधी खादी आश्रम भंडार के जगदीश यादव ने बताया कि मसलिन खादी के कपड़े बंगाल से आते हैं। यहां पर दो सौ से लेकर 600 रुपये मीटर तक की रेंज के कपड़े मिल जाते हैं। इसके कपड़े काफी मजबूत होने के साथ ही आरामदायक भी होते हैं। जिसके कारण नेताओं के बीच यह एक पसंदीदा पोशाक होती है। वहीं, इसकी साड़ी भी 1500 से 2500 हजार रुपये तक मिल जाती है। इसके कुर्ते, पायजामे, पैंट आदि की बिक्री अधिक है।
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गांधी आश्रम के लेखाकर रामानंद ने बताया कि केंद्र में दिसंबर में 25 लाख 98 हजार रुपये की कुल बिक्री हुई थी। वही, जनवरी में 21 लाख रुपये की बिक्री हुई है। हालांकि कोई नेता कभी पूरा थान नहीं खरीदता है। मसलिन के कपड़ों को नेता अब कम पसंद करते हैं। हालांकि आम जनता इसे खरीदने को लेकर जागरूक रहती है। चुनाव के पूर्व से ही लेनिन कपड़े की बिक्री अचानक बढ़ी थी।

कपड़ा व्यवसायी मनोज कुमार का कहना है कि किसी ने 10 तो किसी ने 20 कुर्ता-पायजामे के लिए कपड़ा खरीदा था। इक्का-दुक्का नेता ऐसे रहे, जिन्होंने अपने 40 से 50 कार्यकर्ताओं के लिए भी कपड़ा खरीदा।
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