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82 बीघा जमीन पर बनेगा महाराजा सुहेलदेव का स्मारक

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बहराइच के चित्तौरा स्थित महाराजा सुहेलदेव के मंदिर में स्थापित प्रतिमा। - फोटो : BAHRAICH
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बहराइच। महाराजा सुहेलदेव स्मारक का निर्माण पयागपुर राजघराने की 82 बीघे जमीन पर होगा। इसे स्मारक समिति के अध्यक्ष राजा यशुवेंद्र विक्रम सिंह ने 30 साल के लिए लीज पर दी है। स्मारक के निर्माण के लिए गठित महाराजा सुहेलदेव स्मृति न्यास को जमीन दी गई है। जिसके लिए बीते दिनों सीएम योगी आदित्यनाथ से भी प्रभारी मंत्री अनिल राजभर की पहल पर राजा ने मुलाकात की थी। अब 16 फरवरी को पीएम नरेंद्र मोदी स्मारक के निर्माण कार्य का शिलान्यास वर्चुअल माध्यम से करेंगे।
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चित्तौरा में महाराजा सुहेलदेव स्मारक के निर्माण के लिए जमीन की कमी आड़े आ रही थी। यहां सबसे अधिक जमीन पयागपुर राजघराने की है। जमीन की कमी को देखते हुए राजघराने ने अपने हिस्से की 82 बीघा जमीन को लीज पर देने का निर्णय लिया। पयागपुर राजघराने के राजा यशुवेंद्र विक्रम सिंह के निर्णय की बात सामने आने के बाद जिले के प्रभारी मंत्री अनिल राजभर ने सीएम योगी आदित्यनाथ के सामने प्रस्ताव को रखा।
बीते दिनों राजा यशुवेंद्र की सीएम से मुलाकात भी हुई थी। स्मारक के लिए जमीन की कमी दूर करते हुए राजा यशुवेंद्र ने पयागपुर स्टेट की 82 बीघा जमीन लीज पर दी है। यह जमीन महाराजा सुहेलदेव स्मृति न्यास को 30 साल के लिए लीज पर दे दी गई है। जमीन मिलने के बाद प्रशासन द्वारा यहां पर निर्माण कार्य तेज कराया गया है।
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महाराजा सुहेलदेव स्मारक समिति के अध्यक्ष राजा यशुवेंद्र विक्रम सिंह को स्मृति न्यास का आजीवन उपाध्यक्ष बनाया गया है। न्यास के अध्यक्ष पदेन डीएम होंगे। सचिव पदेन उपजिलाधिकारी और संरक्षक मंडल में प्रदेश के पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के मंत्री अनिल राजभर होंगे। 11 सदस्यीय न्यास पर्यटन के विकास की संभावनाओं और योजनाओं को लेकर काम करेगा।
राजा यशुवेंद्र विक्रम सिंह ने बताया कि महाराजा सुहेलदेव मंदिर का निर्माण राज परिवार के राजा वीरेंद्र विक्रम सिंह द्वारा कराया गया था। इसके बाद महाराजा सुहेलदेव स्मारक समिति के अध्यक्ष उनके पिता राजा यादवेंद्र विक्रम सिंह रहे। जिसके बाद वह अध्यक्ष बने हैं। राज परिवार हमेशा समाज के लिए सर्वस्व न्योछावर करने को तत्पर रहा है। आज समाज के लिए हम जो करते हैं, वह आगे चलकर नजीर बनती है। महाराजा सुहेलदेव ने समाज के लिए बलिदान दिया। आज उनके लिए हमने जमीन देकर परंपरा का निर्वहन किया है।
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