बहराइच। जिले में बाढ़ की तबाही से लोग पहले ही बेहाल हैं, ऊपर से प्रशासन की लापरवाही पीड़ितों के जख्मों पर नमक छिड़क रही है। सरकार ने बाढ़ पीड़ितों के लिए नियमित और भरपेट लंच पैकेट का आदेश दिया है, लेकिन राहत शिविरों में रह रहे परिवारों को दिए जा रहे भोजन के पैकेट सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गए हैं। इससे बाढ़ पीड़ितों की भूख नहीं मिट रही है।
सरकार के आदेश के तहत जो टेंडर हुआ है उसके अनुरूप 99.99 रुपये एक लंच पैकेट पर खर्च होना है। इसमें चार पूड़ियां, दाल, सब्जी, चावल, अचार और एक मिठाई शामिल होनी चाहिए। लेकिन बाढ़ पीड़ितों को दिए जा रहे पैकेट में सिर्फ चार छोटी पूड़ियां, आलू-सोयाबीन की रसेदार सब्जी, अचार और एक लड्डू है।
जिले के 40 से अधिक गांव बाढ़ से जलमग्न हैं। मिहींपुरवा, नानपारा, महसी में लोग अपने घरों को उजाड़ भी रहे हैं। ऐसे में छत के साथ भोजन के संकट से भी लोगों को जूझना पड़ रहा है। जानकी नगर के बुजुर्ग राम दयाल ने बताया कि दिए गए भोजन के पैकेट में न दाल है, न चावल और न ही पेट भरने लायक सब्जी। बाढ़ पीड़ितों ने व्यवस्था पर आक्रोश जताते हुए कहा कि जो लंच पैकेट दिया जा रहा है उससे तो एक बच्चे का भी पेट नहीं भरेगा, हम बड़ों की तो बात ही छोड़िए। इसी तरह के अब तक 1500 से अधिक पैकेट का वितरण बाढ़ पीड़ितों में किया जा चुका है।
पीड़ितों का कहना है कि राहत के नाम पर वितरित किए जा रहे लंच पैकेट की सिर्फ खानापूर्ति हो रही है। कुछ लोगों ने तो यह तक कहा कि वह लंच पैकेट लेने की जगह खुद ही कुछ इंतजाम करने को मजबूर हैं।
नानपारा में छह हजार पैकेट का आदेश
आपदा प्रबंधन विभाग ने नानपारा तहसील में राहत कार्यों के लिए एमएस जायसवाल फूड्स को 6,000 वेज लंच पैकेट सप्लाई करने का आदेश दिया है। हर पैकेट की कीमत 99.99 तय की गई है, कुल खर्च करीब 5.99 लाख होगा। यह व्यवस्था 30 सितंबर 2025 तक लागू रहेगी। एसडीएम नानपारा टीएन शुक्ला ने नानपारा क्षेत्र में लंच पैकेट वितरण के आदेश दिए है। लेकिन अगर बाढ़ पीड़ितों तक खाना इस हाल में पहुंच रहा है, तो बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर ये 99.99 रुपये किस चीज के लिए खर्च हो रहे हैं।
वर्जन
लंच पैकेट का टेंडर तहसील से हुआ है। जानकारी करके ही बता पाऊंगा कि क्या-क्या देना है। लंच पैकेट में पूरा भोजन होना चाहिए। -अमित कुमार एडीएम