राष्ट्रीयकृत बैंकों की हड़ताल के कारण मंगलवार को पांचवें दिन भी बैंकों में ताला लटकता रहा। लगातार बैंकों की बंदी से ग्राहकों के सामने आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है। उपभोक्ता रुपयों के लिए दिनभर इधर-उधर भटकते रहे। हड़ताल से करीब 40 करोड़ रुपये का लेनदेन प्रभावित हुआ।
चार दिन के अवकाश के बाद मंगलवार को खुलने वाले राष्ट्रीयकृत बैंक हड़ताल के कारण बंद रहे। इस दौरान पैसा लेने बैंक आने वाले ग्राहकों को मायूस होकर लौटना पड़ा। देखा जाए तो नोटबंदी के बाद बचत खातों से पैसा निकालने की अधिकतम सीमा 24 हजार रुपये निर्धारित की गई थी। ऐसे में तमाम लोगों को पैसे के लिए अगले हफ्ते तक का इंतजार करना पड़ रहा था।
यह सीमा बढ़ा कर 50 हजार रुपये किए जाने के दूसरे दिन 24 फरवरी से ही बैंक बंद हो गए। ऐसे में पैसे के लिए हर किसी को मंगलवार को बैंक खुलने का इंतजार था। लेकिन नौ बैंक यूनियंस (यूएफबीयू) की ओर से विभिन्न मांगों को लेकर 28 फरवरी को एक दिन की हड़ताल की घोषणा कर दिए जाने के कारण मंगलवार को खुलने वाले बैंकों के ताले नहीं खुले। ऐसे में जरूरत के लिए पैसा निकालने इलाहाबाद बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, यूनियन बैंक, स्टेट बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, सिंडीकेट बैंक, सेंट्रल बैंक, यूको बैंक सहित अन्य बैंकों में आने वाले ग्राहकों को मायूस होकर लौटना पड़ा।
सिर्फ एचडीएफसी बैंक में ही सामान्य दिनों की तरह मंगलवार को ताला खुला। एचडीएफसी बैंक के एटीएम को छोड़ कर शेष सभी बैंक के एटीएम भी मंगलवार को खाली रहे, जिससे पैसे के लिए लोग इधर-उधर भटकते रहे। बैंकों की हड़ताल के कारण करीब 40 करोड़ रुपये का लेनदेन प्रभावित हुआ। इस संबंध में अग्रणी बैंक प्रबंधक एसके झा ने कहा कि मंगलवार को हड़ताल के कारण बैंकों में तालाबंदी रही। बुधवार से सभी बैंकों में सामान्यता लेनदेन प्रारंभ हो जाएगा।