फखरपुर। राज्य कर विभाग की विशेष अनुसंधान शाखा (एसआईबी) ने जीएसटी फर्जीवाड़े के एक बड़े मामले का खुलासा किया है। जांच में सामने आया कि कागजों पर एक फर्जी फर्म संचालित कर लाखों रुपये का अवैध लेनदेन दर्शाया गया और सरकार को भारी राजस्व की क्षति पहुंचाई गई। विभाग की तहरीर पर पुलिस ने फर्म की महिला संचालक पर प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
सहायक आयुक्तराज्य कर, गोंडा क्षेत्र अनिल कुमार त्रिपाठी की ओर से दर्ज कराई गई प्राथमिकी के अनुसार, एम/एस वीके एंटरप्राइजेज नामक फर्म ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में बिना वास्तविक माल की आपूर्ति किए 1,26,85,200 रुपये की आउटवर्ड सप्लाई दर्शाई। इस लेनदेन के आधार पर 22,83,336 रुपये का फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट के द्वारा कर चोरी की गई।
विभागीय टीम ने जब घोषित व्यापार स्थल बुबकापुर गांव में मकान संख्या 435, खसरा संख्या 347 की जांच की तो पता चला कि वहां कोई फर्म संचालित ही नहीं है। इस पर फर्म स्वामिनी संतोष के मोबाइल पर टीम ने संपर्क करने की कोशिश की लेकिन नंबर बंद पाया गया।
जांच में स्पष्ट हुआ कि फर्म केवल कागजी अस्तित्व में थी और इसका गठन राजस्व चोरी के उद्देश्य से किया गया था। इस पर फर्म का जीएसटी पंजीकरण निलंबित कर फर्म की मालकिन के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। थानाध्यक्ष संजीव चौहान ने बताया कि विवेचना उपनिरीक्षक श्याम सिंह यादव को सौंपी गई है।