बहराइच। नेपाल सीमा पर बसे इस जनपद को जिला मुख्यालय से राजधानी तक जोड़ने के लिए रेलमार्ग का इंतजार है। जागरूक नागरिकों की ओर से इसके लिए लगभग दो दशक से मुहिम चलाई जा रही है। इस बार रेलवे विभाग ने सर्वे कराकर मुहिम से जुड़े लोगों की उम्मीद बढ़ा दी है।
इस अभियान को लेकर बहराइच जिला मुख्यालय से लेकर लखनऊ जीपीओ तक धरना दिया गया। नागरिकों के उत्साह को देखते हुए दो वर्ष पूर्व तत्कालीन सांसद अक्षयवरलाल गोंड ने संसद में बहराइच से जरवलरोड तक रेल लाइन की अनिवार्यता का मुद्दा उठाया।
काफी प्रयास के बाद सर्वे किए जाने की घोषणा हुई, लेकिन कार्यवाही फिर ठिठक गई। इस बीच फिर से बहराइच से जरवलरोड रेल लाइन जोड़ो आंदोलन के तहत हस्ताक्षर अभियान चलाया गया। अंतत: सर्वे टीम ने अपना काम पूरा किया और सर्वे रिपोर्ट रेल मंत्रालय को भेज दी गई। तभी से अभियान से जुड़े लोग रेल बजट में बहराइच से जरवलरोड रेल लाइन की उम्मीद तलाश रहे थे।
इस बार रेल कनेक्टिविटी का भारी भरकम बजट देखकर उम्मीद बंधी है। मुहिम से जुड़े कैसरगंज क्षेत्र के ग्राम गुथिया निवासी शिक्षक डाॅ. सत्यभूषण सिंह का कहना है कि इस बार के बजट में रेलवे के विस्तार और आधुनिकीकरण के लिए 2,93,030 करोड़ का रिकॉर्ड बजट आवंटित किया गया है।
कहा कि रेलवे की कनेक्टिविटी पर भी इस बजट में जोर दिया गया है। इससे हम लोगों को उम्मीद है कि बहराइच से जरवलरोड रेलमार्ग का निर्माण तेजी से होगा और बहराइच के विकास को गति मिलेगी।
सस्ता होगा लखनऊ तक का सफर
बहराइच से जरवलरोड तक रेल लाइन की सुविधा होने से लखनऊ तक का किराया सौ रुपये के अंदर ही रहेगा। रोडवेज बस का किराया लगभग दो सौ रुपये है। इस सुविधा को लेकर प्रतियोगी परीक्षा देने वाले युवाओं को काफी सुविधा होगी। साथ ही लखनऊ से बहराइच की नियमित यात्रा करने वालों को भी राहत मिलेगी।
सामरिक और व्यापारिक दृष्टिकोण से भी है महत्वपूर्ण
बहराइच से जरवलरोड रेल लाइन की सुविधा हो जाने से नेपाल सीमा पर बसे बहराइच जनपद का सामरिक और व्यापारिक पक्ष भी मजबूत होगा। यह जनपद जंगलों से आच्छादित है। ऐतिहासिक और पौराणिक स्थलों से परिपूर्ण इस जिले में जहां पर्यटन के क्षेत्र में काफी प्रगति होगी, वहीं यातायात की सुविधा होने से जो कारोबारी अब तक उद्योग लगाने से अपने कदम पीछे हटा लेते थे, अब वे सक्रिय होंगे।