रामगांव (बहराइच)। शिक्षा क्षेत्र चित्तौरा की ग्राम पंचायत फत्तेपुरवा के मजरा विश्वरिया स्थित प्राथमिक विद्यालय का विलय शासन प्राथमिक विद्यालय फत्तेपुरवा में कर दिया गया है। विलय के बाद प्राथमिक विद्यालय विश्वरिया में ताला जड़ दिया गया है लेकिन शासन की यह कवायद गांव के 38 बच्चों के पठन-पाठन पर भारी पड़ने लगी है। अभिभावक अपने नौनिहालों को ढाई किमी दूर स्थित फत्तेपुरवा स्कूल भेजने से कतरा रहे हैं और बच्चों को घर पर बैठा दिया गया है।
अभिभावकों को स्कूल के रास्ते में पड़ने वाले बहराइच-नानपारा हाईवे व जंगल सरीखे बड़े व घने बाग का डर सता रहा है। अभिभावकों का तर्क है कि हाईवे पर लगातार वाहनों का आवागमन होता है, इससे छोटे-छोटे बच्चों के हादसे का शिकार होने की आशंका है। वहीं, बाग में रहने वाले जानवर भी बच्चों के लिए घातक हो सकते हैं।
बताते चलें कि प्राथमिक विद्यालय फत्तेपुरवा में पहले से 96 बच्चें पंजीकृत हैं। जबकि इस विद्यालय में कुल पांच कमरे हैं और इसमें से एक कमरा जर्जर भी है। वहीं, अब इसमें विश्वरिया से 38 बच्चों का भी विलय कर दिया गया है ।
पांच साल की बच्ची कैसे जाए दो किमी दूर
छात्रा मानवी के पिता बबलू ने बताया कि उनकी बेटी पांच साल की है और उसका कक्षा एक में दाखिला हुआ है। मुझे सुबह मजदूरी के लिए जाना होता है। ऐसे में पांच साल की बच्ची का रोज पैदल ढाई किमी आना-जाना संभव नहीं है।
सूनसान रास्ता, अपराधियों का डर भी
कामनी की माता तारा देवी ने बताया कि उनकी बेटी कक्षा पांच की छात्रा है। नया स्कूल लगभग ढाई किमी दूर है और रास्ता पूरी तरह से सूनसान है। बेटियोंं के साथ हो रहीं आपराधिक घटनाओं को देखते हुए सूनसान रास्ते से बेटी को पढ़ने भेजने की हिम्मत नहीं है।
रास्ते की समस्या
छात्रा अंशी के पिता अनंतराम ने बताया यदि विद्यालय विश्वरिया में ही संचालित रहता तो हमारे बच्चे भी पढ़ लेते। स्कूल जाने वाला पक्का मार्ग लंबा है, वहीं कच्चे मार्ग की दूरी तो कम है लेकिन रास्ता खराब है। बच्ची को घर पर ही पढ़ाएंगे।
हाईवे पर हादसे का खतरा
विद्यालय प्रबंध समिति के अध्यक्ष सतगुर ने बताया कि बच्चों के लिए सबसे बड़ी समस्या गांव और विद्यालय के बीच से गुजर रहे हाईवे है। हाईवे से लगातार छोटे-बड़े वाहन गुजरते हैं। ऐसे में किसी भी समय बच्चे हादसे का शिकार हो सकते हैं।
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आदमखोर कुत्तों का डर
अनीता ने बताया कि उनके तीन बच्चे प्राथमिक विद्यालय विश्वरिया में पढ़ते थे लेकिन विलय के बाद से घर पर रहते हैं। बच्चों को सूनसान व जंगल जैसे रास्ते पर अकेले भेजने में खतरा है। भेड़िये के बाद अब कुत्ते भी बच्चों को निवाला बना रहे हैं।
शासन के निर्देश पर विद्यालयों का विलय किया गया है। बच्चों के अभिभावकों को विलय किए गए विद्यालयों में बच्चों को भेजने के लिए जागरुक किया जा रहा है। कई अभिभावकों ने बच्चों को भेजना शुरू भी कर दिया है।
- अनुराग मिश्रा, खंड शिक्षाधिकारी