मिहींपुरवा / बाबागंज / चरदा (बहराइच)। जिले के पश्चिमी छोर पर जंगल से सटे इलाकों में बुधवार की दोपहर बारिश के साथ जमकर ओलावृष्टि हुई। अचानक मौसम में आए इस बदलाव से क्षेत्र के किसानों की गेहूं, मसूर तथा चना इत्यादि की तैयार फसलों को भारी नुकसान हुआ है। हालांकि इस मौसमी बदलाव से तापमान में गिरावट दर्ज हुई है। इसका असर जिला मुख्यालय तक दिखाई दिया।
बुधवार को मिहींपुरवा तहसील क्षेत्र में दोपहर बाद करीब 4 बजे अचानक मौसम बदला और बारिश होने लगी। बारिश के साथ ओलावृष्टि भी हुई। ओलावृष्टि से देखते ही देखते पूरी सड़क सफेद हो गई। ग्रामीणों के अनुसार लगभग 100 ग्राम वजन तक के ओले गिरे हैं। ओलावृष्टि से मिहींपुरवा तहसील क्षेत्र के गायघाट, मटिहा मोड़, राजापुर पुरैना, भवानी बक्श, चिकनिया तथा बढ़ैय्या सहित लगभग दो दर्जन से अधिक गांवों में गेहूं तथा अन्य फसलों को नुकसान हुआ है। संतोष वर्मा चिकनिया, अमित कुमार गायघाट तथा मनीष चौधरी बढ़ैय्या आदि क्षेत्र के लोगों ने बताया कि बारिश व ओले गिरने से गेहूं, मसूर, सरसों तथा चना आदि की तैयार फसल चौपट हो गई है।
बाबागंज क्षेत्र में तैयार हो चुकी गेहूं की फसल को किसान काटकर अपने घर लाने की तैयारी कर रहे थे, लेकिन बुधवार को दोपहर बाद हुई ओलावृष्टि व बारिश से किसानों के चेहरे मुरझा गए हैं। क्षेत्रीय किसान बलबीर सिंह, बिरजा आर्या, चेतन आर्या, देवेंद्र पाठक, रामकुमार शर्मा तथा दिनेश कुमार आदि ने बताया कि हम किसानों के जीवकोपार्जन का मुख्य जरिया खेती-किसानी से होता है। बेमौसम हुई ओलावृष्टि के साथ बारिश से काफी नुकसान हुआ है।
चरदा क्षेत्र के गंगापुर, बरवलिया, पुरैना, पुरैनी, खरहनिया, बंजरिया, गोपालपुर, महराजनगर समेत कई दर्जन गांवों में भी ओलावृष्टि व बारिश से गेहूं की फसल प्रभावित हुई है। सिसैया निवासी परमानन्द वर्मा ने बताया कि अचानक हुई बरसात और ओलों से हुए नुकसान से किसानों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ सकता है। प्रभावित किसानों ने तहसील प्रशासन से नुकसान का आकलन कर प्रभावित किसानों की सहायता के लिए तत्काल कदम उठाने की अपील की है।