तराई और नेपाल के पहाड़ों पर हो रही वर्षा के चलते घाघरा नदी का जलस्तर फिर बढ़ने लगा है। एक सेंटीमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से नदी का जलस्तर बढ़ रहा है, जिसके चलते कटान तेज हो गई है।
महसी तहसील का जरमापुर गांव निशाने पर है। मंगलवार को गांव के पास सुबह से देर शाम तक 30 बीघा खेत को नदी में समा चुके हैं लेकिन अब तक कटाने रोकने के उपाय नहीं किए गए हैं।
उधर, जरवल क्षेत्र का गड़रियनपुरवा गांव भी नदी के निशाने पर है।
तराई में फिर वर्षा का क्रम शुरू हो गया है। उधर, नेपाल के पहाड़ों पर निरंतर बरसात हो रही है जिसके चलते घाघरा की लहरें फिर तबाही मचाने संकेत देने लगी हैं।
केंद्रीय जलायोग संस्थान घाघराघाट के मापक जगदीश ने बताया कि भोर से नदी एक सेंटीमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से बढ़ रही है।
एल्गिन ब्रिज पर जलस्तर 105.396 मीटर मापा गया है। उधर, जलस्तर बढ़ने के साथ ही महसी तहसील के जरमापुर गांव के निकट नदी ने कटान शुरू कर दी है। गांव निशाने पर आ गया है।
भोर चार बजे से मंगलवार शाम तक गांव निवासी राजेश कुमार, देवराय, बालकराम, रामानंद, मंगरे, नोखे, बचऊ, लालजी और सोनू समेत 10 किसानों की 30 बीघा जमीन नदी ने लील लिए।
दहशतजदा गांव के लोग सुरक्षित ठिकानों की तलाश में जूझ रहे हैं। सूचना तहसील को दी गई लेकिन कटान रोकने को उपाय नहीं हुए हैं।
एसडीएम के निर्देश पर लेखपाल रामानुज गिरि ने गांव पहुंचकर कटान की स्थिति देखी है। लेखपाल ने बताया कि कटान की रिपोर्ट तहसील को भेजी जा रही है। जिनका नुकसान हुआ है, उन्हें मुआवजा प्रदान किया जाएगा।
उधर, जरवल स्थित गड़रियनपुरवा गांव भी नदी के निशाने पर आ गया है, जिसके चलते गांव में बचे 16 परिवार दहशतजदा हैं।
गांव निवासी मनोरथ और प्रताप का कहना है कि 10 दिन से बचाव कार्य पूरी तरह ठप है। नदी ने फिर कटान शुरू कर दी है। ऐसे में गांव का नदी में डूबना तय है।
ग्रामीण अपने आशियाने तोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं।