नानपारा की डेढ़ लाख आबादी को स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने की जिम्मेदारी सीएचसी नानपारा की है लेकिन यहां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खुद बीमार है।
डॉक्टरों की तैनाती कहने भर को है। आधे से अधिक चिकित्सकों के पद रिक्त हैं। आठ साल से सीएचसी में एक भी ऑपरेशन नहीं हुआ।
एक्सरे मशीन है तो जरूर लेकिन टेक्नीशियन की तैनाती नहीं हैं। एंबुलेंस खराब हैं। हालात यह हैं कि आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक महिला चिकित्सक प्रसव कराती हैं।
नानपारा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की स्वास्थ्य सेवाएं पटरी पर नहीं आ रही हैं। स्वास्थ्य केंद्र पर प्रतिदिन औसतन 250 से 300 मरीज ओपीडी में पहुंचते हैं।
अस्पताल भी 30 बेड का है लेकिन इन मरीजों को स्वास्थ्य परीक्षण के लिए पर्याप्त चिकित्सक नहीं है। चिकित्सक डॉ. रोहित सर्जन के पद पर तैनात थे।
वर्ष 2007 में उनका स्थानांतरण हो गया। तब से एक भी सर्जन की तैनाती नहीं हुई है। जिसके कारण ऑपरेशन थियेटर में मशीनें जंग खा रही हैं।
फिजीशियन व महिला चिकित्सक की कुर्सी खाली है। संविदा पर नियुक्त डॉ. चंद्रभान पर ही ओपीडी के मरीजों के स्वास्थ्य परीक्षण का जिम्मा है।
कहने को तो एमबीबीएम डॉ. मोहम्मद सैफ व नेत्र सर्जन डॉ. दिलशाद ने माह भर पूर्व कार्यभार संभाला है। लेकिन अक्सर इन डॉक्टरों की कुर्सी खाली रहती है।
सीएचसी का चार्ज बाबागंज के चिकित्सक डॉ. राजेश गौतम के पास है। वह बाबागंज में ही रहते हैं। ऐसे में सीएचसी पर आने वाले मरीजों का इलाज भगवान भरोसे होता है।
नहीं चलता जनरेटर
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का जनरेटर दो साल से नहीं चल रहा है। बात करने पर कर्मचारियों ने बताया कि डीजल का बजट नहीं मिलता।
इस कारण जनरेटर जस का तस खड़ा है। जनरेटर न चलने के कारण सीएचसी में भर्ती होने वाले मरीज भीषण गर्मी में परेशान रहते हैं।
बाहर से लिखी जातीं दवाइयां
सीएचसी में पैथालॉजी और दवा वितरण कक्ष है लेकिन भर्ती होने वाले मरीजों को दवाइयां नहीं मिलती है। बाहर से ही मरीज दवाइयां खरीदते हैं।
सीएचसी पर मरीज के साथ आए तीमारदार राजेश और विनोद ने बताया कि उनके रोगी को डायरिया की शिकायत थी लेकिन दवाएं बाहर से खरीदीं।