बहराइच/राजीचौराहा। घाघरा नदी का जलस्तर काफी कम हो गया है लेकिन कटान बढ़ गई है। महसी का कायमपुर गांव नदी के निशाने पर आ गया है। रात से अब तक 10 मकान नदी में समाहित हुए हैं।
कटान की दहशत से ग्रामीण आशियाने उजाड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर गए हैं। इसके चलते गांव खंडहर में तब्दील नजर आ रहा है। आसपास गांव के लोगों में भी हड़कंप है।
राजस्वकर्मियों को तहसील प्रशासन ने गांव में कैंप करने के निर्देश दिए हैं।
केंद्रीय जलायोग संस्थान घाघराघाट के मापक जगदीश प्रसाद ने बताया कि नदी का जलस्तर 105.586 मीटर मापा गया है लेकिन जलस्तर में कमी के चलते महसी, नानपारा और कैसरगंज क्षेत्र में कटान तेज हो गई है।
महसी तहसील के कायमपुर गांव में 150 मकान थे लेकिन नदी ने धीरे-धीरे पूरे गांव को खत्म कर दिया। 25 मकान मंगलवार तक बचे थे, उनमें से रात से अब तक 10 मकान समाहित हुए है।
इनमें रामसमुझ, घसीटे, विश्वनाथ, रूपरानी, राजरानी, वीरेंद्र कुमार, रामसुधि, बड़की, बुच्चे, रोशनलाल शामिल हैं। इससे गांव में हड़कंप मचा हुआ है।
कायमपुर स्थित प्राथमिक विद्यालय भवन भी नदी के निशाने पर आ गया है। नदी और स्कूल की दूरी महज 50 मीटर बची है। इसके चलते शिक्षकों में भी दहशत है।
वहीं, पिपरा गांव के निकट नदी की लहरें खेती योग्य जमीन को लील रही हैं। इनमें राकेशधर, उमेश, वसीम, अनिल समेत 13 किसानों की 40 बीघा जमीन नदी की भेंट चढ़ी है।
उधर, कैसरगंज तहसील के गोड़हिया और गड़रियनपुरवा के पास करीब 50 बीघा खेती योग्य जमीन नदी में समाहित हुई है, जबकि नानपारा तहसील क्षेत्र में 25 बीघा खेती योग्य जमीन कटान में समाहित हुई है।
महसी क्षेत्र के कायमपुर गांव के पूरी तरह उजड़ जाने की सूचना मिलने पर एसडीएम चंद्रप्रकाश तिवारी ने तहसीलदार देवेश चंद्र गुप्ता के साथ मौके का मुआयना किया।
एसडीएम ने क्षेत्रीय लेखपाल रामानुज गिरि को गांव में ही कैंप करने के आदेश दिए हैं।
एसडीएम ने कहा कि जो मकान और खेत कटेंगे, उनकी सूची लेखपाल तैयार कर रिपोर्ट तहसील को भेजेंगे। उसी के आधार पर मुआवजा निर्धारित होगा।