बहराइच। घाघरा नदी के जलस्तर में लगातार उतार-चढ़ाव हो रहा है। मंगलवार रात तक नदी का जलस्तर बढ़ा। इसके बाद फिर स्थिर हो गया। मगर कटान थम नहीं रही है। नदी की लहरें कैसरगंज तहसील क्षेत्र के भिरगूपुरवा गांव लील लेने को बेताब दिख रही हैं।
गांव के 13 मकान कटान की भेंट चढ़ गए हैं। कटान तेज होने के चलते अब तक 220 परिवार अपना आशियाना उजाड़ चुके हैं। 88 बीघा खेती योग्य जमीन भी बुधवार को नदी में समा गई। कटान की दहशत के चलते गांव में अफरातफरी की स्थिति है। सूचना के बावजूद राजस्वकर्मी अब तक गांव नहीं पहुंचे हैं। जबकि ग्रामीण निरंतर पलायन कर रहे हैं।
घाघरा नदी अभी बाढ़ का सबब नहीं बनी है। मगर नदी की लहरें तट पर बसे गांवों को लीलने को बेताब दिख रही हैं। तेजी से कटान हो रही है। कैसरगंज तहसील अंतर्गत भिरगूपुरवा गांव में 300 मकान थे। मगर अब तक कटान की दहशत से 220 मकान खंडहर में तब्दील हो चुके हैं। लोग गृहस्थी का सामान बटोरकर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर गए हैं।
नदी ने कटान करते हुए मंगलवार रात से अब तक राजकुमार, बबलू, शिवानंद, जगदीश, देवता, गिरजा, बालकराम, महादेव, शंकर समेत 13 लोगों के आशियाने लील लिए हैं। हालांकि जो मकान नदी में समाहित हुए हैं। उन्हें ग्रामीणों ने पहले ही खाली कर दिया था। इसके चलते जान-माल का नुकसान नहीं हुआ। मगर कटान की स्थिति यही रही तो आगामी तीन-चार दिन में गांव का अस्तित्व ही खत्म हो जाएगा।
उधर मंझारा तौकली और रोहितपुरवा गांव की ओर नदी तेजी से बढ़ रही है। नदी का गांव से फासला महज 80 से 100 मीटर ही बचा है। इसके चलते इन दोनों गांवों के लोग भी सुरक्षा को लेकर दहशतजदा हैं। सूचना के बावजूद अब तक कोई भी राजस्वकर्मी मौके पर नहीं पहुंचा है। मकानों के साथ ही खेती योग्य जमीन भी निरंतर नदी की भेंट चढ़ रही है। बुधवार को 88 बीघा जमीन नदी में समाहित हुई है।
उपजिलाधिकारी रामजीत मौर्य ने बताया कि बाढ़ और कटान प्रभावित इलाकों का निरंतर निरीक्षण किया जा रहा है। राजस्वकर्मियों की मदद से कटान पीड़ित ग्रामीणों की सूची तैैयार कराई जा रही है। सभी को मुआवजा प्रदान किया जाएगा। अभी नदी का जलस्तर इतना नहीं है कि बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो। मगर कटान चल रही है। कटान की रोकथाम के लिए सरयू ड्रेनेज खंड प्रथम के अभियंताओं को निर्देशित किया गया है।