आग ने मंगलवार की शाम जमकर कहर बरपाया। घाघरा के कछार में स्थित गड़रियनपुरवा गांव में अज्ञात कारणों से लगी आग से मकान धू-धू कर जल गए। चीख पुकार मच गई। लोग दौड़े, लेकिन तब तक आग की लपटों ने पूरे गांव को चपेट में ले लिया। ग्रामीणों की आंखों के सामने उनके 310 आशियाने राख के ढेर में तब्दील हो गए। वहीं, 18 मवेशियों की जिंदा जलकर मौत हो गई। चार घंटे बाद किसी तरह ग्रामीणों ने आग पर काबू पाया। सूचना के बावजूद दमकल वाहन गांव तब पहुंचा, जब लपटें शांत हो गईं।
मिहींपुरवा विकास खंड की ग्राम पंचायत सोमईगौढ़ी का मजरा गड़रियनपुरवा घाघरा के कछार में बसा है। गांव निवासी सूबेदार के मकान में करीब 2:30 बजे अज्ञात कारणों से आग लग गई। चीख पुकार सुनकर गांव के लोग दौड़े। लेकिन इस दौरान चल रही तेज पछुवा हवा से आग की लपटें तेजी से फैल गईं और देखते ही देखते पूरा गांव धधक उठा।
गांव में अफरा-तफरी मच गई। कुछ ग्रामीणों ने मोतीपुर थाने को घटना की सूचना दी। लेकिन दमकल वाहन समय से नहीं पहुंचा। जिसका नतीजा यह रहा कि ग्रामीणों की आंखों के सामने उनके आशियाने धू-धू कर जल गए।
गांव में 425 कच्चे व पक्के मकान थे। इनमें 310 मकान खंडहर में तब्दील हो गए। सिर्फ पक्के मकान ही शेष हैं। 310 परिवारों के तीन हजार लोग खुले आसमान तले गुजर-बसर करने को मजबूर हो गए। इस दौरान 18 मवेशी जिंदा जलकर मर गए। वहीं एक जनरल स्टोर भी आग की भेंट चढ़ गया।
सूचना पाकर नायब तहसीलदार सुमित सिंह, राजस्व निरीक्षक पवन सुत, लेखपाल रामपलट, दुर्गेश, रामप्रसाद वर्मा, सफाईकर्मी नंदकिशोर आदि ने गांव पहुंचकर जांच शुरू कर दी है। नायब तहसीलदार ने कहा कि क्षेत्र के कोटेदारों की सहायता से सभी के भोजन का इंतजाम करवाया जाएगा। मुआवजे की भी कार्रवाई शीघ्र होगी।
गड़रियनपुरवा निवासी सूबेदार, बेचन, रामसुमिरन, सालिकराम, रामनरेश, रामादेवी, प्यारेलाल, रामनरायन, बदलू पाल, रामसहाय, झुर्रा, फूलचंद, लखन, भूरे, रामसेवक, बच्चू, मिलन, शिवनंदन, रामचंदर, पतीराम, कोयली, मिट्टी, त्रिलोकी, पुत्तन, चेतराम, छतरपाल, झींगुर, रमेश, गिरधारी, बदलू, बनवारी, भगौती, रामतपेश्वर, रामगोपाल, बुद्धीलाल, सालिकराम, हरीराम, भगेलू समेत 310 लोगों के मकान जल गए हैं। इन मकानों के साथ ही 10 बकरे, दो गाय, एक सूकर समेत 18 मवेशी जलकर मर गए।